नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय कथित आतंकी-अपराधी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों और अपराधियों के इशारे पर काम कर रहा था तथा राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अशांति फैलाने की साजिश रच रहा था। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल फोन और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद हुई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह मॉड्यूल सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को अपने नेटवर्क से जोड़ रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों को धन, हथियार और तेज़ी से आपराधिक दुनिया में पहचान बनाने का लालच देकर भर्ती किया जाता था। इसके बाद उन्हें संवेदनशील स्थानों की रेकी करने, तस्वीरें और वीडियो जुटाने तथा इन जानकारियों को विदेशी हैंडलरों तक पहुंचाने के निर्देश दिए जाते थे।
8 हजार फोटो-वीडियो से खुल सकते हैं कई राज
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों से करीब 8 हजार फोटो और वीडियो मिले हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से नेटवर्क की गतिविधियों, संपर्कों और संभावित निशानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ इन सभी डेटा की विस्तृत जांच कर रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका जांच के घेरे में
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अनस त्यागी, मोहित योगी, दीपक अग्रेला, आरिफ, करनवीर सिंह, जतन और साबिर शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि इनमें से कई आरोपी पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शाहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों के संपर्क में थे। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नेटवर्क का विस्तार किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें कितने अन्य लोग शामिल हो सकते हैं।
सोशल मीडिया बना भर्ती का माध्यम
पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि युवाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के माध्यम से संपर्क किया जाता था। कथित हैंडलर पहले उन्हें आर्थिक मदद और बेहतर जीवनशैली का लालच देते थे, फिर धीरे-धीरे उन्हें आपराधिक और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास करते थे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह तरीका हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क द्वारा अपनाया गया है।
संवेदनशील स्थानों की रेकी कराने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को सार्वजनिक स्थलों, भीड़भाड़ वाले बाजारों, धार्मिक स्थलों और अन्य संवेदनशील इलाकों की रेकी करने के निर्देश दिए गए थे। इन स्थानों की तस्वीरें और वीडियो कथित तौर पर विदेश में बैठे संचालकों को भेजे जा रहे थे। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन जानकारियों का अंतिम उद्देश्य क्या था और क्या किसी बड़ी साजिश की तैयारी चल रही थी।
समय रहते कार्रवाई से टली बड़ी घटना
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि समय रहते की गई कार्रवाई से एक संभावित बड़ी साजिश को विफल किया गया है। फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और उनके डिजिटल नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन तथा संपर्क सूत्रों की जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे तथा अतिरिक्त गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि इसके पूरे तंत्र का पर्दाफाश किया जा सके और भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।