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कफ सिरप पर सरकार का बड़ा फैसला: अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी दवा

नई दिल्ली। देश में दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने कफ सिरप की बिक्री को लेकर बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कफ सिरप से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत अब कई प्रकार की कफ सिरप केवल डॉक्टर […]

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  • June 16, 2026 11:30 am IST, Published 27 minutes ago

नई दिल्ली। देश में दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने कफ सिरप की बिक्री को लेकर बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कफ सिरप से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत अब कई प्रकार की कफ सिरप केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही उपलब्ध हो सकेंगी।

मंत्रालय के अनुसार, कफ सिरप को वर्तमान छूट वाली श्रेणी (Schedule K) से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो मेडिकल स्टोर बिना डॉक्टर के पर्चे के कफ सिरप नहीं बेच सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे दवाओं की अनियंत्रित बिक्री और गलत इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगेगी।

पिछले कुछ वर्षों में कफ सिरप के दुरुपयोग और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर कई मामले सामने आए हैं। खासकर बच्चों और युवाओं में इन दवाओं के गलत उपयोग को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। मंत्रालय का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दवाओं का सेवन केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही होना चाहिए।

नए नियम लागू होने के बाद बिना लाइसेंस या बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के कफ सिरप बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही दवा विक्रेताओं को बिक्री और रिकॉर्ड से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। सरकार इस व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा और निगरानी भी करेगी ताकि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कफ सिरप का अनावश्यक या गलत इस्तेमाल कई बार गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना ऐसी दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

सरकार के इस फैसले को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि इससे दवाओं के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा, मरीजों को सुरक्षित उपचार मिलेगा और बच्चों सहित संवेदनशील वर्गों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

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