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G7 से बाहर रहकर भी वैश्विक राजनीति के केंद्र में भारत

दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह G7 में भारत स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से हर शिखर सम्मेलन में भारत की मौजूदगी लगातार बढ़ती जा रही है। यह केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव का प्रमाण है। आज हालात ऐसे हैं कि दुनिया […]

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Gauravshali Bharat News
  • June 18, 2026 2:36 pm IST, Published 2 hours ago

दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह G7 में भारत स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से हर शिखर सम्मेलन में भारत की मौजूदगी लगातार बढ़ती जा रही है। यह केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव का प्रमाण है। आज हालात ऐसे हैं कि दुनिया के बड़े आर्थिक, सामरिक और जलवायु संबंधी मुद्दों पर भारत को नजरअंदाज कर कोई भी प्रभावी वैश्विक रणनीति तैयार नहीं की जा सकती।

भारत आज विकासशील देशों की सबसे प्रभावशाली आवाज के रूप में उभरा है। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अनेक देश अपनी चिंताओं और अपेक्षाओं को वैश्विक मंचों तक पहुंचाने के लिए भारत को भरोसेमंद साझेदार मानते हैं। यही वजह है कि G7 देशों के लिए भारत के साथ संवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के बड़े हिस्से तक पहुंचने का माध्यम भी है।

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। विशाल उपभोक्ता बाजार, मजबूत सेवा क्षेत्र, बढ़ता विनिर्माण और डिजिटल क्रांति ने भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का अहम खिलाड़ी बना दिया है। निवेश, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में G7 देशों के लिए भारत के साथ सहयोग रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक राजनीति का केंद्र बन चुका है। समुद्री सुरक्षा, व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई पश्चिमी देश भारत को ऐसे साझेदार के रूप में देखते हैं जो क्षेत्रीय स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही है और इस लड़ाई में भारत की भागीदारी बेहद अहम है। नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा विस्तार, हरित विकास और स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा देने के क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भारत जैसे बड़े देश का सहयोग अनिवार्य माना जाता है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान भारत ने कई बार संतुलित और संवाद आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। यही कारण है कि विभिन्न विचारधाराओं और गुटों के बीच भी भारत की स्वीकार्यता बनी हुई है। यह विशेषता भारत को वैश्विक मंचों पर एक भरोसेमंद और प्रभावशाली भागीदार बनाती है।

डिजिटल भुगतान प्रणाली, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भारत ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। भारत के अनुभव और मॉडल को कई देश अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भारत अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।

एक समय था जब भारत वैश्विक मंचों पर अपनी चिंताओं को रखने तक सीमित माना जाता था। आज भारत खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल विकास और वैश्विक दक्षिण के हितों जैसे विषयों पर समाधान और नीतिगत सुझाव प्रस्तुत कर रहा है। यही बदलाव भारत को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।

भारत भले ही G7 का औपचारिक सदस्य न हो, लेकिन उसकी आर्थिक क्षमता, सामरिक महत्व, लोकतांत्रिक पहचान और वैश्विक प्रभाव ने उसे इस मंच का अपरिहार्य साझेदार बना दिया है। बदलती विश्व व्यवस्था में भारत अब केवल एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि उन देशों में शामिल है जिनकी भागीदारी के बिना वैश्विक सहमति और प्रभावी समाधान अधूरे माने जाते हैं।

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