• होम
  • देश
  • RSS की फंडिंग पर सवाल, जांच की मांग से गरमाई सियासत

RSS की फंडिंग पर सवाल, जांच की मांग से गरमाई सियासत

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह  ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनके ताजा बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार से संघ को मिलने वाले धन और उसके उपयोग […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 18, 2026 3:18 pm IST, Published 50 minutes ago

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह  ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनके ताजा बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार से संघ को मिलने वाले धन और उसके उपयोग की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

सीहोर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश में किसी भी संस्था, समिति या बड़े संगठन के संचालन के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रियाएं होती हैं। उनके अनुसार, किसी भी संगठन के वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता होना आवश्यक है। इसी संदर्भ में उन्होंने RSS की कार्यप्रणाली और वित्तीय स्रोतों को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।

कांग्रेस नेता का कहना है कि बड़े स्तर पर सामाजिक और सेवा गतिविधियों का संचालन करने वाले संगठनों के वित्तीय स्रोतों और खर्चों की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि RSS द्वारा विभिन्न सामाजिक अभियानों और राहत कार्यों में बड़े पैमाने पर संसाधनों के उपयोग की जानकारी दी जाती रही है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि इन गतिविधियों के लिए धन कहां से आता है और उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा जाता है।

दिग्विजय सिंह ने चंपत राय बंसल  को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने अयोध्या में चल रहे विभिन्न कार्यों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए कि वहां कई मामलों में पारदर्शिता की जरूरत है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

कांग्रेस नेता ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण  से मांग की कि RSS को मिलने वाले दान और आर्थिक संसाधनों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी संगठन के पास बड़े पैमाने पर धनराशि आती है और वह व्यापक स्तर पर सामाजिक गतिविधियां संचालित करता है, तो उसके वित्तीय ढांचे को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए।

दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। RSS और भाजपा से जुड़े नेताओं ने अतीत में ऐसे आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताया है, जबकि विपक्षी दल समय-समय पर संगठन की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच वैचारिक टकराव के चलते ऐसे मुद्दे लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने रहेंगे। RSS देश के सबसे बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों में से एक माना जाता है और उससे जुड़े किसी भी बयान का राष्ट्रीय राजनीति पर असर दिखाई देता है। इसलिए दिग्विजय सिंह की यह मांग आने वाले समय में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू कर सकती है।

 

Advertisement