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₹15,000 करोड़ की लागत से बनेगा नया इमरजेंसी ऑयल रिजर्व

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान जंग के खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर एक बेहद बड़ा फैसला किया है। भारत अब संकट के समय से निपटने के लिए एक नया इमरजेंसी ऑयल रिजर्व (Emergency Oil Reserve) बनाने जा रहा है। इस पूरे […]

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  • June 20, 2026 5:14 am IST, Published 4 hours ago

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान जंग के खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर एक बेहद बड़ा फैसला किया है। भारत अब संकट के समय से निपटने के लिए एक नया इमरजेंसी ऑयल रिजर्व (Emergency Oil Reserve) बनाने जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब ₹15,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

📍 कहां बनेगा यह नया ऑयल रिजर्व?

यह नया अंडरग्राउंड (भूमिगत) तेल भंडार कर्नाटक के मंगलुरु में बनाया जाएगा। इस रिजर्व को बनाने की जिम्मेदारी दिग्गज सरकारी कंपनी ONGC (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन) को सौंपी गई है।

🛢️ 11 दिन तक नहीं होगा तेल का संकट

  • मौजूदा क्षमता: फिलहाल भारत के पास करीब 3.9 करोड़ बैरल क्रूड ऑयल का स्ट्रेटेजिक स्टोरेज है, जो देश की जरूरतों को लगभग 8 से 9 दिनों तक पूरा कर सकता है।

  • नई क्षमता: मंगलुरु में बनने वाले इस नए रिजर्व में 1.28 लाख बैरल तेल स्टोर किया जा सकेगा।

  • कुल बैकअप: इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही देश की तेल भंडारण क्षमता करीब 33% बढ़ जाएगी। यानी किसी युद्ध या वैश्विक तेल संकट की स्थिति में भारत के पास पूरे 11 दिनों का बैकअप रहेगा।

💰 बजट और खर्च का पूरा गणित

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ₹15,000 करोड़ के इस भारी-भरकम बजट को दो हिस्सों में बांटा गया है:

  1. ₹5,000 करोड़: जमीन के नीचे गुफानुमा टैंक (Underground Caves) के निर्माण पर खर्च होंगे।

  2. ₹10,000 करोड़: मौजूदा बाजार कीमतों के हिसाब से इस फैसिलिटी में कच्चा तेल (Crude Oil) भरने के लिए चाहिए होंगे।

पहली बार ONGC करेगी निवेश: अब तक देश के सभी स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व का खर्च पूरी तरह सरकार उठाती थी और इसका मैनेजमेंट इंडियन स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) करती थी। लेकिन यह पहली बार है जब ONGC इसमें इतना बड़ा निवेश करने जा रही है।

🤔 समझिए, क्या होता है पेट्रोलियम रिजर्व?

यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

  • रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Reserve): यह सरकार की ‘तेल की तिजोरी’ है, जिसे सिर्फ युद्ध, महामारी या सप्लाई चेन टूटने जैसी इमरजेंसी में ही खोला जाता है। वर्तमान में भारत के पास मंगलुरु, पादुर और विशाखापट्टनम में ऐसे रिजर्व हैं।

  • व्यावसायिक पेट्रोलियम भंडार (Commercial Reserve): यह इंडियन ऑयल या BPCL जैसी कंपनियों का रोजमर्रा का स्टॉक होता है, जिससे देश के पेट्रोल पंपों पर नियमित सप्लाई बनी रहती है।

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