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ओडिशा में देश की पहली ‘कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट’ परियोजना की आधारशिला रखेंगे PM मोदी!

नई दिल्ली/झारसुगुड़ा: देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए 20 जून, 2026 को भारत एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में ₹25,016 करोड़ की विशालकाय कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) परियोजना की आधारशिला रखेंगे। यह देश की पहली वाणिज्यिक (Commercial) स्तर […]

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  • June 20, 2026 6:14 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली/झारसुगुड़ा: देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए 20 जून, 2026 को भारत एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में ₹25,016 करोड़ की विशालकाय कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) परियोजना की आधारशिला रखेंगे।

यह देश की पहली वाणिज्यिक (Commercial) स्तर की कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट (Coal-to-Ammonium Nitrate) उत्पादन परियोजना होगी, जो भारत के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल कर रख देगी।

🏭 क्या है लखनपुर परियोजना और क्यों है यह ऐतिहासिक?

  • मेक इन इंडिया की ताकत: इस प्रोजेक्ट को ‘भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड’ (BHEL) और ‘कोल इंडिया लिमिटेड’ (CIL) का संयुक्त उद्यम—भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) विकसित कर रहा है।

  • स्वदेशी तकनीक: इसमें BHEL द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित कोयला गैसीकरण तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

  • विशाल उत्पादन: इस प्लांट से प्रतिदिन 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन किया जाएगा।

  • 350 एकड़ में फैलेगा प्रोजेक्ट: यह परियोजना महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की करीब 350 एकड़ भूमि पर बनेगी, जिसके लिए भूमि पट्टे का समझौता पहले ही हो चुका है। कोयला मंत्रालय इस प्रोजेक्ट को ₹1,350 करोड़ की वित्तीय सहायता भी दे रहा है।

💡 समझिए, क्या होती है कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) तकनीक?

इस आधुनिक और स्वच्छ तकनीक के तहत ठोस कोयले को सीधे जलाने के बजाय, उसे रासायनिक प्रक्रिया के जरिए सिंथेटिक गैस (सिन्गैस – Syngas) में बदला जाता है।

इस सिन्गैस का उपयोग मेथनॉल, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस जैसे कई कीमती और जरूरी रसायनों को बनाने में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। इससे पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचता है।

💰 हर साल बचेगा ₹2.7 लाख करोड़ का विदेशी मुद्रा कोष

भारत वर्तमान में हर साल लगभग ₹2.7 लाख करोड़ के मध्यवर्ती रासायनिक उत्पादों का आयात विदेशों से करता है।

₹46,000 करोड़ की बड़ी योजना: सरकार ने देश में ऐसी परियोजनाओं को गति देने के लिए ₹46,000 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस पहल से देश के कोयला उत्पादक क्षेत्रों की 25 परियोजनाओं में ₹2.5 से ₹3 लाख करोड़ के भारी-भरकम निवेश की उम्मीद है।

💼 रोजगार के बंपर अवसर

भारत के पास 400 अरब टन से अधिक का दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा कोयला भंडार है। इस अनमोल संसाधन का सही इस्तेमाल करके यह मेगा प्रोजेक्ट न सिर्फ आयात पर निर्भरता खत्म करेगा, बल्कि देश में लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

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