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माता-पिता का बढ़ाया मान, बिहार की बेटी श्रद्धा पांडेय ने BPSC में किया टॉप, बनीं युवाओं के लिए मिसाल

पटना/प्रतापगढ़: मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई इबारत लिखने वाली बिहार की बेटी श्रद्धा पांडेय ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और क्षेत्र के लोगों में […]

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  • June 22, 2026 7:30 pm IST, Published 2 hours ago

पटना/प्रतापगढ़: मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई इबारत लिखने वाली बिहार की बेटी श्रद्धा पांडेय ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनकी सफलता को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बता रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, श्रद्धा पांडेय ने BPSC परीक्षा में 593 अंक हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया। खास बात यह है कि उन्होंने यह सफलता किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद के बिना हासिल की। उनकी मेहनत, अनुशासन और लगातार अध्ययन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। वर्तमान में श्रद्धा उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट कमिश्नर (वाणिज्य कर) के पद पर कार्यरत हैं और सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने BPSC जैसी कठिन परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की।

श्रद्धा पांडेय की प्रारंभिक शिक्षा साधारण माहौल में हुई। उनके पिता संतोष पांडेय पेशे से किसान और वकील हैं, जबकि उनकी माता सुनीता पांडेय गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया और हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। श्रद्धा का कहना है कि माता-पिता का विश्वास और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब श्रद्धा ने किसी प्रतियोगी परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की हो। इससे पहले भी उन्होंने UPPCS परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सरकारी सेवा में स्थान बनाया था। अब BPSC में टॉप कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

श्रद्धा की सफलता की खबर सामने आते ही प्रतापगढ़ और बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में खुशी का माहौल बन गया। लोगों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया और परिवार को बधाइयां दीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रद्धा ने यह दिखा दिया है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र-छात्राएं भी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए श्रद्धा पांडेय की कहानी एक मजबूत संदेश देती है। उन्होंने साबित किया है कि सफलता के लिए केवल महंगे संसाधन ही जरूरी नहीं होते, बल्कि निरंतर प्रयास, सही रणनीति और आत्मविश्वास भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उनकी उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

श्रद्धा पांडेय की इस ऐतिहासिक सफलता ने न केवल उनके परिवार का गौरव बढ़ाया है, बल्कि पूरे समाज को यह विश्वास भी दिलाया है कि कड़ी मेहनत और समर्पण के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज उनकी सफलता की कहानी देशभर के युवाओं को आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा दे रही है।

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