नई दिल्ली/पटना: मेडिकल प्रवेश परीक्षा RE-NEET 2026 को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। बिहार पुलिस ने एक बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ करते हुए 24 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गैंग असली उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठाकर मोटी रकम के बदले परीक्षा पास कराने का खेल चला रहा था। इस घटना ने देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार, मामला तब सामने आया जब बिहार के कुछ परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की पहचान में गड़बड़ी पाई गई। बायोमेट्रिक सत्यापन, एडमिट कार्ड और पहचान पत्रों के मिलान के दौरान कई संदिग्ध मामले सामने आए। जांच गहराने पर पता चला कि कुछ लोग असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर छापेमारी की और 24 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार लोगों में केवल फर्जी परीक्षार्थी ही नहीं, बल्कि MBBS छात्र, मेडिकल कॉलेजों से जुड़े छात्र और कथित मास्टरमाइंड भी शामिल हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह कोई छोटा-मोटा नकल गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित और पेशेवर नेटवर्क है, जिसके तार कई राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े में एक उम्मीदवार के बदले परीक्षा देने की डील 40 लाख रुपये तक में तय की जाती थी। पैसे लेकर मेधावी छात्रों या मेडिकल छात्रों को दूसरे उम्मीदवारों की जगह परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था और अब तक कितने उम्मीदवार इसके जरिए परीक्षा दे चुके हैं।
सबसे बड़ा सवाल परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहा है। इतने बड़े स्तर पर फर्जी उम्मीदवारों का प्रवेश यह संकेत देता है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के ऐसा संभव नहीं था। जांच एजेंसियां अब बायोमेट्रिक सिस्टम, परीक्षा केंद्र स्टाफ और निजी एजेंसियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन और दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि 3 मई 2026 को आयोजित मूल NEET परीक्षा पहले ही पेपर लीक विवाद के कारण रद्द करनी पड़ी थी। इसके बाद NTA ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ पुनर्परीक्षा कराई थी। लेकिन अब RE-NEET में सॉल्वर गैंग के पकड़े जाने से एक बार फिर परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय हैं। अभिभावकों में भी भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब छात्र वर्षों मेहनत करते हैं, तब ऐसे गिरोह पैसे के दम पर सिस्टम को कमजोर कर देते हैं।
फिलहाल बिहार पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। आशंका है कि आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शिता और सख्त निगरानी की पहले से ज्यादा जरूरत है।