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दिल्ली में सर्जरी विवाद, गलत नस काटने का आरोप मचा हड़कंप

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कथित मेडिकल लापरवाही का एक मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) की सर्जरी के दौरान डॉक्टर ने गलती से उसकी गलत नस काट दी, जिससे उसकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बढ़ […]

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  • June 27, 2026 6:30 pm IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कथित मेडिकल लापरवाही का एक मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) की सर्जरी के दौरान डॉक्टर ने गलती से उसकी गलत नस काट दी, जिससे उसकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बढ़ गईं। महिला का कहना है कि जब उसने इस गंभीर लापरवाही को लेकर डॉक्टर से जवाब मांगा, तो उसे संतोषजनक स्पष्टीकरण देने के बजाय कथित तौर पर कहा गया कि यह “अल्लाह की मर्जी” थी।

पीड़िता के इन आरोपों के सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बड़ी संख्या में लोग इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही तथा मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, अस्पताल और संबंधित डॉक्टर की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

महिला के अनुसार, वह गॉल ब्लैडर की सामान्य सर्जरी के लिए अस्पताल पहुंची थी। डॉक्टरों ने आवश्यक जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी थी। परिजनों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि ऑपरेशन सफल रहेगा और मरीज जल्द स्वस्थ होकर घर लौट आएगी। लेकिन ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत में सुधार होने के बजाय नई जटिलताएं सामने आने लगीं।

पीड़िता का आरोप है कि बाद में जांच में पता चला कि सर्जरी के दौरान गलत नस कट गई थी। इसके कारण उसे अतिरिक्त इलाज और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता पड़ी। महिला का कहना है कि इस लापरवाही से उसे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तीनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।

महिला ने दावा किया कि जब उसने डॉक्टर से इस गलती के बारे में सवाल किया और जिम्मेदारी तय करने की बात कही, तब डॉक्टर ने कथित तौर पर इसे “अल्लाह की मर्जी” बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया। इसी बयान को लेकर सोशल मीडिया पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मेडिकल लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की है। कई लोगों का कहना है कि यदि किसी मरीज के साथ इलाज के दौरान गंभीर गलती होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि लापरवाही साबित होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि हर सर्जरी में कुछ चिकित्सकीय जोखिम जरूर होते हैं, लेकिन यदि स्थापित चिकित्सा मानकों का पालन नहीं किया जाता या लापरवाही बरती जाती है, तो उसकी जांच आवश्यक होती है। किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष मेडिकल रिकॉर्ड, विशेषज्ञ समिति की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि मरीजों को उपचार से पहले संभावित जोखिमों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही ऑपरेशन के बाद यदि कोई जटिलता सामने आती है तो उसकी पारदर्शी तरीके से जानकारी मरीज और उसके परिजनों को देना अस्पताल की जिम्मेदारी होती है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी मरीज को चिकित्सा लापरवाही का संदेह हो तो वह संबंधित अस्पताल प्रबंधन, राज्य चिकित्सा परिषद, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) या उपभोक्ता आयोग सहित सक्षम मंचों पर शिकायत दर्ज करा सकता है। जांच के बाद यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित डॉक्टर या संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़िता के आरोपों की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकेगी। ऐसे मामलों में सभी पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित माना जाता है।

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