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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने 120 किमी/घंटा स्पीड ट्रायल पूरा, ग्रीन रेलवे की दिशा में बड़ा कदम

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन ने दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल पूरा कर लिया है। इस परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची […]

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  • June 27, 2026 5:00 pm IST, Published 53 minutes ago

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन ने दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल पूरा कर लिया है। इस परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन को प्राथमिकता दी जा रही है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) की निगरानी में यह हाई-स्पीड ट्रायल दिल्ली-अंबाला रेलखंड पर सब्जी मंडी और सोनीपत जंक्शन के बीच किया गया। परीक्षण का उद्देश्य ट्रेन की गति, सुरक्षा, ब्रेकिंग सिस्टम, ऊर्जा दक्षता और अन्य तकनीकी मानकों का मूल्यांकन करना था।

120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हुआ सफल परीक्षण

हाइड्रोजन ट्रेन ने ट्रायल के दौरान लगभग 40 किलोमीटर की दूरी निर्धारित समय में पूरी की। सुबह करीब 8:50 बजे सब्जी मंडी स्टेशन से रवाना हुई ट्रेन लगभग 9:20 बजे सोनीपत जंक्शन पहुंची। इस दौरान ट्रेन ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल की।

ट्रायल के दौरान रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों ने इंजन के प्रदर्शन, हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम, पावर सप्लाई, ब्रेकिंग, कंपन, शोर स्तर और ट्रैक पर ट्रेन की स्थिरता सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तृत जांच की।

पहले जींद-सोनीपत सेक्शन पर चल रहा था परीक्षण

इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच लगभग 89 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर किया जा रहा था। अब सफल स्पीड ट्रायल के बाद रेलवे ने इसे बड़े रेल नेटवर्क पर परीक्षण के अगले चरण में पहुंचा दिया है। इससे भविष्य में इस तकनीक के व्यापक उपयोग का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।

क्या है हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत?

हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन की तरह प्रदूषण नहीं फैलाती। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है। इसी बिजली से ट्रेन संचालित होती है।

इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता। इसके बजाय केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है, जिससे यह पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है।

ग्रीन एनर्जी की दिशा में भारतीय रेलवे का बड़ा लक्ष्य

भारतीय रेलवे आने वाले वर्षों में अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कई नई तकनीकों पर काम कर रहा है। रेलवे का लक्ष्य भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देना है। हाइड्रोजन ट्रेन इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।

रेल मंत्रालय का मानना है कि जहां रेलवे लाइनों का पूर्ण विद्युतीकरण संभव नहीं है, वहां हाइड्रोजन ट्रेनें प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बन सकती हैं। इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी और ईंधन लागत में भी कमी आने की संभावना है।

सुरक्षा और तकनीकी मानकों की हुई जांच

स्पीड ट्रायल के दौरान रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन के सभी महत्वपूर्ण सिस्टम की बारीकी से निगरानी की। इसमें फ्यूल सेल की कार्यक्षमता, ऊर्जा आपूर्ति, आपातकालीन ब्रेकिंग, ट्रैक पर स्थिरता, उच्च गति पर कंपन और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का परीक्षण किया गया।

यदि आगामी परीक्षण भी सफल रहते हैं, तो रेलवे इस तकनीक को चुनिंदा रूटों पर चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना सकता है।

पर्यावरण संरक्षण में मिलेगी बड़ी मदद

भारत में रेलवे प्रतिदिन लाखों यात्रियों और भारी मात्रा में माल परिवहन का कार्य करता है। ऐसे में स्वच्छ ऊर्जा आधारित ट्रेनों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन तकनीक भविष्य के टिकाऊ परिवहन का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

इसके अलावा, यह पहल भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन और नेट-जीरो उत्सर्जन के दीर्घकालिक लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगी।

भविष्य की संभावनाएं

सफल स्पीड ट्रायल के बाद भारतीय रेलवे अब हाइड्रोजन ट्रेन के अन्य तकनीकी परीक्षणों पर भी काम करेगा। सभी परीक्षण सफल होने के बाद इसे नियमित संचालन के लिए तैयार किया जा सकता है। यदि यह परियोजना पूरी तरह सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में देश के कई गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनें दौड़ती दिखाई दे सकती हैं।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का यह सफल स्पीड ट्रायल न केवल रेलवे तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की ओर भी एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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