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दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के 650 करोड़ खरीद घोटाले में जांच तेज

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य सामग्री की खरीद से जुड़े कथित 650 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने शनिवार को इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों, खरीद प्रक्रिया से जुड़े वेंडरों […]

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  • June 28, 2026 1:00 pm IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य सामग्री की खरीद से जुड़े कथित 650 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने शनिवार को इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों, खरीद प्रक्रिया से जुड़े वेंडरों और अन्य संबंधित लोगों सहित छह संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। जांच एजेंसियां खरीद प्रक्रिया, टेंडर मंजूरी, भुगतान और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, मामले में वर्तमान प्रभारी डीजीएचएस डॉ. सुषमा जैन से भी पूछताछ की गई है। उनसे विभागीय रिकॉर्ड, खरीद संबंधी फाइलें और विभिन्न निर्णयों से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान मिले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशों के बाद इस पूरे मामले की जांच में तेजी लाई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के तहत जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

एसीबी की टीम हिरासत में लिए गए लोगों से अलग-अलग स्तर पर पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि खरीद प्रक्रिया के दौरान टेंडर कैसे जारी किए गए, किन कंपनियों को अनुबंध मिले, बाजार दरों की तुलना में खरीद किस कीमत पर हुई और भुगतान की प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया। साथ ही संबंधित अधिकारियों और निजी कंपनियों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

यह मामला केंद्रीय प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) के माध्यम से दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए दवाओं, सर्जिकल सामग्री, चिकित्सा उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य सामग्री की खरीद से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं बाजार मूल्य से अधिक कीमतों पर खरीद, बिना वास्तविक आवश्यकता के सामान की खरीद, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर और कुछ सप्लायरों को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसी गड़बड़ियां तो नहीं की गईं।

जांच एजेंसियां विभिन्न विभागीय फाइलों, वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल डेटा का भी विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से पूरे मामले की कड़ियां स्पष्ट हो सकती हैं। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों और सप्लायर कंपनियों के बीच हुए पत्राचार और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

इस मामले में पहले भी बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। केंद्रीय प्रोक्योरमेंट एजेंसी के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को एसीबी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल को पहले निलंबित किया गया था। बाद में उनके साथ उप नियंत्रक लेखा नीरज चोपड़ा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अब जांच का दायरा और विस्तृत किया जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाई जा सके।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। जिन अधिकारियों, कर्मचारियों या निजी कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों से लगातार पूछताछ जारी है और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार भविष्य में खरीद प्रक्रिया को और अधिक तकनीकी एवं निगरानी आधारित बनाने पर भी विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पूरी होती है तो इससे सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस कथित 650 करोड़ रुपये के खरीद घोटाले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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