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मुंडका हादसा: पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ मुआवजे की मांग

नई दिल्ली : मुंडका क्षेत्र में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आकर तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी की मांग तेज हो गई है। दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी तथा शिक्षाविद् डॉ. दयानंद वत्स […]

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  • June 27, 2026 9:30 pm IST, Published 14 seconds ago

नई दिल्ली : मुंडका क्षेत्र में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आकर तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी की मांग तेज हो गई है। दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी तथा शिक्षाविद् डॉ. दयानंद वत्स भारतीय ने दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता से मानवीय आधार पर मृतकों के प्रत्येक परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता तथा परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का आग्रह किया है।

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डॉ. दयानंद वत्स भारतीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में कहा कि मुंडका सेप्टिक टैंक हादसे में जान गंवाने वाले तीनों मजदूर सुल्तानपुरी के निवासी थे और अत्यंत गरीब परिवारों से संबंध रखते थे। उन्होंने कहा कि परिवार के कमाने वाले सदस्यों की असामयिक मृत्यु से उनके परिजनों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि यह केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रश्न है। यदि प्रत्येक परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाती है तो इससे प्रभावित परिवारों को भविष्य में जीवनयापन का सहारा मिल सकेगा।

डॉ. वत्स ने इस घटना को गंभीर प्रशासनिक चेतावनी बताते हुए कहा कि दिल्ली के सभी वैध एवं अवैध औद्योगिक क्षेत्रों में बने सेप्टिक टैंकों और सीवर सिस्टम का व्यापक सर्वे कराया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि दिल्ली नगर निगम और दिल्ली फायर सर्विस की संयुक्त टीमों का गठन कर ऐसे सभी स्थानों की जांच कराई जाए, जहां जहरीली गैस बनने की आशंका हो सकती है।

उन्होंने कहा कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में वर्षों से सेप्टिक टैंकों की नियमित जांच नहीं होती, जिससे इस प्रकार की दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

डॉ. दयानंद वत्स भारतीय ने फैक्टरी मालिकों से भी प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों के संचालकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने परिसरों में सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करें और कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। किसी भी प्रकार की लापरवाही मानव जीवन के लिए घातक साबित हो सकती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से यह भी आग्रह किया कि भविष्य में किसी भी सेप्टिक टैंक या सीवर लाइन की सफाई के लिए मजदूरों को सीधे अंदर उतारने की अनुमति न दी जाए। इसके स्थान पर आधुनिक मशीनों और यांत्रिक उपकरणों के माध्यम से सफाई व्यवस्था लागू की जाए, ताकि मानव जीवन को जोखिम में डालने की आवश्यकता ही न पड़े।

डॉ. वत्स ने कहा कि देश में आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद कई स्थानों पर आज भी मजदूरों से जोखिम भरे कार्य कराए जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि मैनुअल सफाई की परंपरा पूरी तरह समाप्त कर मशीन आधारित व्यवस्था को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली सरकार इस दर्दनाक हादसे से सबक लेते हुए पीड़ित परिवारों को शीघ्र राहत प्रदान करेगी और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस नीति बनाएगी। साथ ही सभी संबंधित विभागों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए जाएंगे।

गौरतलब है कि मुंडका में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं और सीवर तथा सेप्टिक टैंक सफाई की मौजूदा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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