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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता पर सुनाया बड़ा फैसला

वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर एक महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक माना जाएगा, भले ही उसके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या अस्थायी वीजा पर अमेरिका आए हों। इस […]

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  • July 1, 2026 11:59 pm IST, Published 1 hour ago

वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर एक महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक माना जाएगा, भले ही उसके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या अस्थायी वीजा पर अमेरिका आए हों। इस फैसले को अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की भावना के अनुरूप बताया जा रहा है और इसे आव्रजन नीति से जुड़े सबसे अहम निर्णयों में से एक माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में आव्रजन और नागरिकता से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। अदालत ने उस कार्यकारी आदेश को प्रभावी होने से रोक दिया, जिसमें जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की कोशिश की गई थी। न्यायालय ने कहा कि संविधान में दिए गए अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती और किसी कार्यकारी आदेश के जरिए संवैधानिक प्रावधानों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

यह मामला उस आदेश से जुड़ा था, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने यह प्रस्ताव रखा था कि अमेरिका में जन्म लेने वाले उन बच्चों को स्वतः नागरिकता नहीं मिलेगी, जिनके माता-पिता अवैध रूप से देश में रह रहे हैं या केवल अस्थायी वीजा पर मौजूद हैं। इस आदेश को कई राज्यों, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने अदालत में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन स्पष्ट रूप से अमेरिका में जन्म लेने वाले व्यक्तियों को नागरिकता का अधिकार प्रदान करता है। अदालत ने माना कि इस संवैधानिक व्यवस्था को केवल कार्यकारी आदेश के माध्यम से बदला नहीं जा सकता। यदि इस व्यवस्था में बदलाव करना है तो उसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया अपनानी होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता की व्यवस्था पिछले करीब 158 वर्षों से लागू है। यह अधिकार वर्ष 1868 में लागू हुए अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन से मिला था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि देश में जन्म लेने वाले सभी लोगों को समान नागरिक अधिकार प्राप्त हों और उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए।

इस फैसले के बाद आव्रजन अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने राहत जताई है। उनका कहना है कि अदालत ने संविधान की मूल भावना की रक्षा की है और लाखों परिवारों के भविष्य को सुरक्षित किया है। उनका मानना है कि यदि जन्मसिद्ध नागरिकता समाप्त होती, तो बड़ी संख्या में बच्चे कानूनी अनिश्चितता का सामना करते।

दूसरी ओर, सख्त आव्रजन नीति के समर्थकों का कहना है कि जन्मसिद्ध नागरिकता की वर्तमान व्यवस्था का दुरुपयोग किया जाता है और इस विषय पर व्यापक कानूनी तथा राजनीतिक बहस की आवश्यकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल संविधान के तहत मिलने वाला यह अधिकार यथावत बना रहेगा।

कानूनी जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भविष्य में नागरिकता और आव्रजन से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों में बदलाव केवल निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही संभव है।

अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है। चुनावी अभियानों के दौरान भी इस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की राय सामने आती रही है। लेकिन ताजा फैसले ने फिलहाल इस अधिकार को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता केवल उनके माता-पिता की आव्रजन स्थिति के आधार पर नहीं छीनी जा सकती।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल अमेरिका की आव्रजन नीति बल्कि वहां की संवैधानिक व्यवस्था और न्यायपालिका की भूमिका को भी मजबूत करता है। आने वाले समय में इस निर्णय का प्रभाव नागरिकता, आव्रजन सुधार और संबंधित कानूनी मामलों पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।

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