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UPA सरकार में शुरू हुई थी पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग: दावा

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने […]

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  • July 2, 2026 8:30 pm IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की शुरुआत मौजूदा सरकार के कार्यकाल में नहीं, बल्कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि चुनिंदा राजनीतिक दावों के आधार पर।

अमित मालवीय की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर केंद्र सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है। उनके पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है और विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं।

अमित मालवीय ने क्या कहा?

अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में लिखा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की अवधारणा नई नहीं है। उनके अनुसार इसकी शुरुआत वर्ष 2001 में एक पायलट परियोजना के रूप में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2004 में इस कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2006 तक देश के कई राज्यों में 5 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E5) लागू किया जा चुका था।

उन्होंने दावा किया कि इस कार्यक्रम का नीति ढांचा बाद में अधिसूचित किया गया और वर्तमान सरकार ने इसे आगे बढ़ाते हुए बड़े स्तर पर लागू किया। मालवीय के अनुसार किसी भी सरकारी कार्यक्रम की उत्पत्ति और उसके विस्तार के बीच अंतर समझना आवश्यक है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम क्या है?

एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल में निर्धारित मात्रा में एथेनॉल मिलाकर जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का तथा अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आती है, किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है और पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रदूषण भी कम होता है।

भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से एथेनॉल मिश्रण को तेजी से बढ़ावा दे रही है। सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है।

UPA और NDA सरकारों की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की शुरुआती रूपरेखा पूर्ववर्ती सरकारों के समय तैयार की गई थी। हालांकि, हाल के वर्षों में इस कार्यक्रम के विस्तार, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, डिस्टिलरी स्थापित करने और एथेनॉल खरीद नीति को मजबूत करने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार किसी भी राष्ट्रीय कार्यक्रम का विकास कई वर्षों में होता है। ऐसे में इसकी शुरुआत, नीति निर्माण और व्यापक क्रियान्वयन अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में हो सकते हैं। यही कारण है कि इस विषय पर राजनीतिक दल अलग-अलग दावे कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

अमित मालवीय की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी तेज़ी से आने लगीं। कुछ लोगों ने उनके दावे का समर्थन किया और कहा कि किसी भी योजना के इतिहास को तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने वर्तमान सरकार द्वारा एथेनॉल ब्लेंडिंग के विस्तार और उपलब्धियों को अधिक महत्वपूर्ण बताया।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए।

देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है एथेनॉल मिश्रण?

भारत दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोलियम आयातकों में शामिल है। ऐसे में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम हो सकता है। इसके अलावा गन्ना किसानों और कृषि क्षेत्र को भी अतिरिक्त बाजार मिलता है। पर्यावरण की दृष्टि से भी एथेनॉल मिश्रित ईंधन कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक माना जाता है।

सरकार का मानना है कि इस कार्यक्रम से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच इतना स्पष्ट है कि यह कार्यक्रम कई वर्षों से चरणबद्ध तरीके से विकसित हुआ है। इसकी प्रारंभिक पहल पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान हुई थी, जबकि बाद के वर्षों में इसके विस्तार और लक्ष्य प्राप्ति के लिए विभिन्न सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर कदम उठाए। ऐसे में इस विषय पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और तथ्यात्मक जानकारी को आधार बनाना अधिक उचित होगा। राजनीतिक दावों के बीच एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का मूल उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण ही बना हुआ है।

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