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कनाडा में चमगादड़ के संपर्क से 11 वर्षीय बच्चे की रेबीज से मौत

नई दिल्ली/ओंटारियो। कनाडा से सामने आए एक दर्दनाक मामले ने पूरी दुनिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। उत्तरी ओंटारियो में रहने वाले 11 वर्षीय एक बच्चे की रेबीज संक्रमण के कारण मौत हो गई। बताया गया कि बच्चा सोते समय अपने चेहरे पर चमगादड़ बैठा हुआ देखकर जाग गया था। परिवार को […]

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  • July 2, 2026 7:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली/ओंटारियो। कनाडा से सामने आए एक दर्दनाक मामले ने पूरी दुनिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। उत्तरी ओंटारियो में रहने वाले 11 वर्षीय एक बच्चे की रेबीज संक्रमण के कारण मौत हो गई। बताया गया कि बच्चा सोते समय अपने चेहरे पर चमगादड़ बैठा हुआ देखकर जाग गया था। परिवार को उसके शरीर पर किसी प्रकार के काटने या खरोंच के निशान नहीं मिले, इसलिए तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं ली गई। लेकिन लगभग 19 दिन बाद बच्चे में गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे और अस्पताल में जांच के दौरान रेबीज संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। यह मामला हाल ही में प्रकाशित एक मेडिकल रिपोर्ट के माध्यम से सामने आया, जिसका उद्देश्य लोगों को चमगादड़ों से जुड़े रेबीज के खतरे के प्रति जागरूक करना है।

कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह घटना वर्ष 2024 की गर्मियों में हुई थी। बच्चा अपने परिवार के साथ उत्तरी ओंटारियो स्थित एक कॉटेज में ठहरा हुआ था। रात के दौरान उसकी नींद खुली तो उसने महसूस किया कि एक चमगादड़ उसके चेहरे, नाक और मुंह के ऊपर बैठा हुआ है। बच्चे ने तुरंत हाथ से उसे हटाया, जबकि उसके पिता ने चमगादड़ को पकड़कर बाहर छोड़ दिया।

चूंकि बच्चे के चेहरे या शरीर पर किसी भी प्रकार का घाव, खरोंच या काटने का निशान दिखाई नहीं दिया और वह सामान्य महसूस कर रहा था, इसलिए परिवार ने इसे गंभीर नहीं माना और अस्पताल नहीं गया।

19 दिन बाद अचानक बिगड़ने लगी तबीयत

घटना के लगभग 19 दिन बाद बच्चे को लगातार उल्टी, चेहरे पर झुनझुनी और सुन्नपन की शिकायत हुई। शुरुआत में उसे सामान्य वायरल संक्रमण समझा गया, लेकिन कुछ ही दिनों में उसकी स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। उसे तेज बुखार, निगलने में कठिनाई, बोलने में परेशानी, भ्रम और तंत्रिका तंत्र से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे।

अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने विस्तृत जांच की, जिसमें रेबीज संक्रमण की पुष्टि हुई। दुर्भाग्यवश, तब तक वायरस शरीर और मस्तिष्क पर गंभीर असर डाल चुका था। अस्पताल में करीब दो सप्ताह तक इलाज चलने के बाद बच्चे की मृत्यु हो गई।

रेबीज के लक्षण आने के बाद बचना बेहद मुश्किल

विशेषज्ञों के अनुसार रेबीज एक घातक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों की लार के संपर्क से फैलती है। एक बार यदि इसके लक्षण दिखाई देने लगें तो बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है। हालांकि, यदि संभावित संपर्क के तुरंत बाद पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) यानी रेबीज वैक्सीन और आवश्यक उपचार समय पर मिल जाए तो संक्रमण को रोका जा सकता है।

चमगादड़ के काटने के निशान हमेशा दिखाई नहीं देते

डॉक्टरों का कहना है कि चमगादड़ के दांत बेहद छोटे और पतले होते हैं। कई बार उनके काटने या खरोंच के निशान दिखाई भी नहीं देते और व्यक्ति को दर्द का एहसास तक नहीं होता। इसी कारण केवल बाहरी घाव न दिखने के आधार पर खतरे को नजरअंदाज करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति का सीधा संपर्क चमगादड़ से हो जाए—चाहे काटने का निशान दिखाई दे या नहीं—तो तुरंत नजदीकी अस्पताल या सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें। समय पर दी गई रेबीज वैक्सीन जीवन बचा सकती है।

डॉक्टरों ने विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि इस दौरान चमगादड़ों के संपर्क में आने की घटनाएं अधिक होती हैं।

दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक बीमारी

कनाडा में इंसानों में रेबीज के मामले बेहद कम सामने आते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में संक्रमण का संबंध चमगादड़ों से पाया गया है। यही कारण है कि इस घटना को मेडिकल जर्नल में प्रकाशित कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

क्या करें यदि चमगादड़ के संपर्क में आएं?

चमगादड़ को नंगे हाथों से न छुएं।

यदि चमगादड़ शरीर या चेहरे को छू जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

काटने या खरोंच का निशान न दिखे तब भी चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज वैक्सीन और आवश्यक उपचार समय पर शुरू कराएं।

बच्चों को वन्यजीवों से दूर रहने और ऐसी किसी भी घटना की तुरंत जानकारी परिवार को देने के लिए जागरूक करें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर उपचार है। किसी भी संभावित जोखिम को हल्के में लेना गंभीर परिणाम दे सकता है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि वन्यजीवों, विशेषकर चमगादड़ों के संपर्क को कभी भी सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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