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उज्जैन में ई-रिक्शा हैक कर वसूली करने वाले ठगी गिरोह का खुलासा

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित ठगों का एक गिरोह ई-रिक्शा चालकों को निशाना बनाकर उनसे अवैध वसूली कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले मोबाइल एप के माध्यम से ई-रिक्शा को रिमोट तरीके से लॉक कर देते […]

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  • July 2, 2026 10:00 pm IST, Published 2 hours ago

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित ठगों का एक गिरोह ई-रिक्शा चालकों को निशाना बनाकर उनसे अवैध वसूली कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले मोबाइल एप के माध्यम से ई-रिक्शा को रिमोट तरीके से लॉक कर देते थे। इसके बाद स्वयं को तकनीकी विशेषज्ञ बताकर वाहन दोबारा चालू कराने के नाम पर चालकों से पैसे वसूलते थे। इस हाईटेक ठगी के खुलासे के बाद पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी ई-रिक्शा में उपयोग होने वाले मोबाइल एप और तकनीकी सिस्टम की जानकारी रखते थे। इसी जानकारी का दुरुपयोग कर वे ई-रिक्शा चालकों को अपना शिकार बनाते थे। जैसे ही कोई चालक वाहन चालू करने की कोशिश करता, उसका ई-रिक्शा लॉक हो जाता और वह असहाय स्थिति में पहुंच जाता।

तकनीकी विशेषज्ञ बनकर करते थे ठगी

जांच में सामने आया कि आरोपी वाहन बंद होने के कुछ समय बाद चालकों से संपर्क करते थे। वे खुद को कंपनी का कर्मचारी या तकनीकी विशेषज्ञ बताते हुए कहते थे कि उनके पास समस्या का समाधान है। इसके बदले वे कुछ हजार रुपये की मांग करते थे। मजबूरी में कई चालक पैसे देकर अपना ई-रिक्शा दोबारा चालू करवाते थे।

पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और कई ई-रिक्शा चालक इसका शिकार बने होंगे। फिलहाल शिकायतकर्ताओं से पूछताछ कर अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है।

एक संदिग्ध हिरासत में

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने ई-रिक्शा का तकनीकी एक्सेस कैसे हासिल किया और क्या इस अपराध में कोई अंदरूनी तकनीकी जानकारी रखने वाला व्यक्ति भी शामिल है।

जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी फॉरेंसिक जांच करा रही हैं ताकि डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा सकें।

साइबर सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने ई-रिक्शा संचालन से जुड़े डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी वाहन का नियंत्रण मोबाइल एप से किया जाता है, तो उसकी साइबर सुरक्षा बेहद मजबूत होनी चाहिए। कमजोर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाकर साइबर अपराधी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन निर्माताओं को अपने एप और सर्वर की सुरक्षा समय-समय पर अपडेट करनी चाहिए। साथ ही उपयोगकर्ताओं को भी केवल आधिकारिक एप का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड या लॉगिन जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

ई-रिक्शा चालकों को पुलिस की सलाह

पुलिस ने ई-रिक्शा चालकों से अपील की है कि यदि उनका वाहन अचानक बंद हो जाए या कोई व्यक्ति तकनीकी सहायता के नाम पर पैसे मांगे, तो तुरंत पुलिस या संबंधित कंपनी के अधिकृत सेवा केंद्र से संपर्क करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को भुगतान करने से पहले उसकी पहचान और अधिकृत होने की पुष्टि अवश्य करें।

इसके अलावा वाहन में उपयोग होने वाले मोबाइल एप का पासवर्ड मजबूत रखें और समय-समय पर उसे बदलते रहें। यदि एप में कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत उसकी सूचना संबंधित कंपनी और पुलिस को दें।

साइबर अपराध के बदलते तरीके

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब केवल बैंकिंग या ऑनलाइन भुगतान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट से जुड़े वाहनों और स्मार्ट डिवाइसों को भी निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में तकनीकी जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। आम लोगों को किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या तकनीकी सहायता के नाम पर मांगी गई रकम से सतर्क रहने की आवश्यकता है।

पुलिस की जांच जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था, कितने लोग इस ठगी का शिकार हुए और आरोपियों के तार किन-किन राज्यों तक जुड़े हैं। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी साइबर अपराध या तकनीकी ठगी की जानकारी तत्काल पुलिस हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में दें। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल तकनीक का सुरक्षित उपयोग और समय रहते शिकायत करना ही ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने का सबसे बेहतर तरीका है।

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