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बैंक भर्ती फर्जीवाड़ा: CBI के 6 राज्यों में छापे, 4 गिरफ्तार

आइरिस स्कैन से पकड़े गए 172 फर्जी बैंक अधिकारी नई दिल्ली। बैंक भर्ती प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पांच साल पुराने परीक्षा रिकॉर्ड की जांच कर ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की है, जिन्होंने कथित तौर पर दूसरे लोगों से परीक्षा दिलवाकर बैंकों में नौकरी हासिल की। जांच में […]

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  • October 13, 2026 8:27 am IST, Published 51 minutes ago

आइरिस स्कैन से पकड़े गए 172 फर्जी बैंक अधिकारी

नई दिल्ली। बैंक भर्ती प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पांच साल पुराने परीक्षा रिकॉर्ड की जांच कर ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की है, जिन्होंने कथित तौर पर दूसरे लोगों से परीक्षा दिलवाकर बैंकों में नौकरी हासिल की। जांच में 257 संदिग्ध अभ्यर्थी सामने आए हैं, जिनमें से 172 अलग-अलग बैंकों में कार्यरत बताए जा रहे हैं।

इस मामले में सीबीआई अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि 135 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में छापेमारी और अन्य कार्रवाई की है।

आंखों के स्कैन से खुला फर्जीवाड़ा

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका आइरिस स्कैन यानी आंखों की पुतली की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड की रही। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन (IBPS) ने भर्ती परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों की तस्वीरों और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की दोबारा जांच की।

जांच के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा में शामिल होने वाले व्यक्तियों के रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। इससे संदेह हुआ कि कुछ उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों ने परीक्षा दी थी।

आरोप है कि फर्जीवाड़े में शामिल लोगों ने भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा और साक्षात्कार दिए। इसके आधार पर कुछ उम्मीदवारों ने बैंक की नौकरी हासिल कर ली।

पांच साल पुराने रिकॉर्ड से ऐसे पकड़े गए आरोपी

सीबीआई और संबंधित संस्थानों ने वर्ष 2020 से 2024 के बीच आयोजित भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड की दोबारा जांच की। इसमें परीक्षा के समय दर्ज किए गए आइरिस स्कैन का मिलान किया गया।

जांच के दौरान कुछ बायोमेट्रिक रिकॉर्ड गिरफ्तार आरोपियों की पहचान से मेल खाते पाए गए, जबकि मूल रिकॉर्ड में ये पहचान उन अभ्यर्थियों के नाम पर दर्ज थीं, जिन्हें बाद में बैंक में नौकरी मिली थी।

इस तकनीकी जांच से पुराने भर्ती रिकॉर्ड और वर्तमान में नौकरी कर रहे संदिग्ध कर्मचारियों के बीच संबंध स्थापित करने में मदद मिली। इसके बाद मामले में कार्रवाई तेज की गई।

IBPS ने संदिग्ध अभ्यर्थियों पर की कार्रवाई

मामले के सामने आने के बाद आईबीपीएस ने कार्यरत संदिग्ध कर्मचारियों और अन्य संबंधित अभ्यर्थियों को भर्ती परीक्षाओं से आजीवन प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की है। संबंधित बैंकों को अपने सेवा नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आरोप साबित होने पर संबंधित कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और लागू सेवा नियमों के अनुसार होगी।

मध्य प्रदेश में 19 बैंक कर्मचारी निलंबित

इस मामले में मध्य प्रदेश में भी कार्रवाई हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच के बाद एक ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। अन्य राज्यों में भी संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।

सीबीआई अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि भर्ती प्रक्रिया में कितने लोगों ने फर्जी पहचान या दूसरे अभ्यर्थियों की मदद से नौकरी हासिल की। जांच का दायरा बढ़ने के साथ अन्य संदिग्धों की पहचान भी की जा सकती है।

भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल

बैंक भर्ती में सामने आया यह मामला चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह उन युवाओं के साथ अन्याय है, जो वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि फर्जीवाड़ा कितने व्यापक स्तर पर हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। फिलहाल सीबीआई की कार्रवाई जारी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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