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ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव रखने वाले आशुतोष दीक्षित बने भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख

वर्तमान समय में हवाई सुरक्षा और आधुनिक युद्ध तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ड्रोन, आधुनिक मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने सैन्य रणनीतियों को नया स्वरूप दिया है। ऐसे में आशुतोष दीक्षित का अनुभव भारतीय वायुसेना की भविष्य की तैयारियों...

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  • October 31, 2026 4:40 pm IST, Published 2 minutes ago

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना को आज नया प्रमुख मिल गया है। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लिया है, जो निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। आशुतोष दीक्षित के पदभार ग्रहण करने के साथ ही भारतीय वायुसेना के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। करीब चार दशक का सैन्य अनुभव रखने वाले दीक्षित को एक अनुभवी फाइटर पायलट और कुशल सैन्य अधिकारी के रूप में जाना जाता है।

Gauravshali Bharatरक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, आशुतोष दीक्षित इससे पहले वायुसेना के उप प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ) के पद पर कार्यरत थे। सरकार ने उन्हें भारतीय वायुसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया था। उन्होंने 31 अक्टूबर की दोपहर से नए पद की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में वायुसेना की परिचालन क्षमता, आधुनिक तकनीक और रक्षा तैयारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

आशुतोष दीक्षित का जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। इसके बाद से उन्होंने अपने सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने वाले दीक्षित को सैन्य रणनीति और परिचालन संबंधी मामलों का अच्छा अनुभव है। उनकी सबसे बड़ी विशेषताओं में व्यापक उड़ान अनुभव शामिल है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनके पास विभिन्न प्रकार के विमानों को उड़ाने का 3,500 घंटे से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करणों, जगुआर, किरण, हॉक, IL-78 और तेजस जैसे विमानों पर उड़ान भरी है। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट होने के साथ-साथ क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं। इस अनुभव के कारण उन्हें वायुसेना की तकनीकी और परिचालन जरूरतों की गहरी समझ रखने वाला अधिकारी माना जाता है।

अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान आशुतोष दीक्षित कई महत्वपूर्ण अभियानों और सैन्य अभ्यासों से जुड़े रहे हैं। इनमें ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम लड़ाकू वायुसेना स्टेशन और दक्षिणी क्षेत्र में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली है। वायुसेना के नए प्रमुख बनने से पहले वह चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के पद पर भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। इन पदों पर उनके अनुभव से उन्हें तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त रक्षा रणनीति की समझ मिली है।

उनकी विशिष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें कई सैन्य सम्मान भी प्रदान किए गए हैं। वर्ष 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनके लंबे सैन्य योगदान और जिम्मेदारियों के निर्वहन को दर्शाते हैं।  नए वायुसेना प्रमुख के सामने आने वाले समय में कई अहम चुनौतियां रहेंगी। इनमें वायुसेना के लड़ाकू बेड़े को मजबूत करना, आधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल करना, स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देना और बदलते सुरक्षा हालात के अनुसार सैन्य तैयारियों को बेहतर बनाना शामिल है। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में रह सकता है।

वर्तमान समय में हवाई सुरक्षा और आधुनिक युद्ध तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ड्रोन, आधुनिक मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने सैन्य रणनीतियों को नया स्वरूप दिया है। ऐसे में आशुतोष दीक्षित का अनुभव भारतीय वायुसेना की भविष्य की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके पदभार संभालने के साथ ही भारतीय वायुसेना में नए नेतृत्व की शुरुआत हो गई है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों और सैन्य विशेषज्ञों की नजर अब उनके नेतृत्व में होने वाले फैसलों पर रहेगी। खासतौर पर स्वदेशी रक्षा उत्पादन, परिचालन क्षमता और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को लेकर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

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