जानकारी के मुताबिक, दीपावली के मद्देनजर पुलिस क्षेत्र में नकबजनी की घटनाओं और आपराधिक गतिविधियों में शामिल संदिग्धों के खिलाफ अभियान चला रही है। इसी दौरान नवाबगंज के बरईपुर गांव में एक व्यक्ति के घर बड़ी मात्रा में नकदी रखे होने की सूचना मिली। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने संबंधित मकान पर पहुंचकर तलाशी ली। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर रखे नोट सामने आने के बाद मौके पर हलचल बढ़ गई और नकदी की गिनती की प्रक्रिया शुरू कराई गई।
घर में रुपये छिपाकर रखे जाने के तरीके ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नकदी प्लास्टिक के तीन ड्रमों के अलावा जमीन के भीतर गड्ढा बनाकर रखी गई थी। बड़ी संख्या में नोट मिलने के कारण उनकी सही मात्रा का पता लगाने के लिए मशीन की मदद ली गई। हालांकि, बरामद रकम कितनी है, नोट किन मूल्यवर्ग के हैं और उन्हें किस उद्देश्य से रखा गया था, इन सवालों के जवाब आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। ग्रामीणों के बीच राजेश यादव के पिछले वर्षों के जीवन और संपत्ति को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजेश लगभग 15 साल पहले मुंबई गया था, जहां वह एक कंपनी में काम करने की बात बताता था। करीब पांच साल पहले गांव लौटने के बाद उसने अलग-अलग स्थानों पर जमीन खरीदी।
इसके अलावा, उसने ट्रैक्टर-ट्रॉली और पिकअप जैसे वाहन भी खरीदे तथा दूसरे गांव में एक बड़ा मकान बनवाया। अब उसके घर से भारी मात्रा में नकदी मिलने की सूचना के बाद लोग उसकी संपत्ति और आय के स्रोत को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और केवल संपत्ति खरीदने या नकदी मिलने के आधार पर किसी तरह की अवैध गतिविधि का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मामले को लेकर डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार ने बताया कि पुलिस नकबजनी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक व्यक्ति के घर पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है।
पुलिस की ओर से बरामद नकदी की कुल राशि और उसके स्रोत के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि रकम कहां से आई, किसकी है और उसे घर में छिपाकर रखने के पीछे क्या कारण था। इस घटना के सामने आने के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और जांच के नतीजों पर सबकी नजर है। नकदी की गिनती पूरी होने, रकम के स्रोत का पता चलने और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी जारी होने के बाद यह भी पता चल सकेगा कि बरामद रकम के संबंध में आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाती है।