धमाके की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए फील्ड यूनिट और बम निरोधक दस्ते (BDS) की टीम को भी बुलाया गया था। दोनों टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य जुटाने की कोशिश की। शुरुआती जांच के दौरान किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, विस्फोट किस वजह से हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हो सकते हैं, इस बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) भी जांच में शामिल हो गई है। नोएडा की एटीएस यूनिट वसुंधरा पुलिस चौकी पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण शुरू किया। एटीएस की टीम धमाके से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इसमें सोशल मीडिया पर सामने आए जिम्मेदारी लेने के दावों की सत्यता की पड़ताल भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले अकाउंट वास्तव में किसी सक्रिय संगठन से जुड़े हैं या फिर लोगों को गुमराह करने के उद्देश्य से ऐसे संदेश प्रसारित किए गए हैं। डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया पोस्ट की प्रामाणिकता की जांच के बाद ही इस संबंध में कोई ठोस निष्कर्ष निकल सकेगा।

इस घटना ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस चौकी जैसी संवेदनशील जगह पर धमाका होना अपने आप में गंभीर मामला है। यही वजह है कि स्थानीय पुलिस के साथ एटीएस भी हर संभावित पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। फिलहाल धमाके के कारण, इसमें इस्तेमाल हुई सामग्री और किसी बाहरी साजिश की भूमिका को लेकर आधिकारिक तौर पर स्थिति साफ नहीं हुई है।
अब जांच का मुख्य केंद्र तीन अहम सवाल हैं। पहला, पुलिस चौकी में विस्फोट आखिर किस कारण हुआ? दूसरा, सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाले कथित संगठन का इस घटना से वास्तव में कोई संबंध है या नहीं? और तीसरा, क्या इस धमाके के पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएंगे। फिलहाल पुलिस और एटीएस की जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर किए गए दावों को गंभीरता से लेते हुए उनकी सत्यता की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों की जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही धमाके की वास्तविक वजह तथा इसके पीछे शामिल लोगों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।