• होम
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली-हावड़ा रूट पर बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, प्रयागराज में बनेगा नया रेल पुल

दिल्ली-हावड़ा रूट पर बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, प्रयागराज में बनेगा नया रेल पुल

नए पुल और तीसरी रेल लाइन के शुरू होने से दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर ट्रेनों की गति और परिचालन क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। इससे आउटर पर ट्रेनों को रोकने की जरूरत कम हो सकती है और रेल यातायात को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इसका लाभ स्थानीय यात्रियों के साथ लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को भी मिल सकता है।

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 23, 2026 2:20 pm IST, Published 1 hour ago

प्रयागराज: दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही सुगम बनाने और पुराने यमुना रेल पुल पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए प्रयागराज और नैनी के बीच एक नया रेल पुल बनाया जाएगा। करीब 800 मीटर लंबा यह दो लेन का पुल मौजूदा पुल के समानांतर तैयार होगा। रेलवे ने परियोजना की ड्राइंग तैयार कर ली है और दिसंबर 2026 से जमीन की पैमाइश शुरू करने की योजना है। रेलवे का लक्ष्य है कि वर्ष 2031 में होने वाले महाकुंभ से पहले नए पुल पर ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाए।

प्रयागराज और नैनी के बीच फिलहाल जिस पुराने पुल से रेलगाड़ियां गुजरती हैं, उसका निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1865 में हुआ था। करीब 160 वर्ष पुराने इस ढांचे से दिल्ली-हावड़ा मार्ग की बड़ी संख्या में ट्रेनें गुजरती हैं। इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने के कारण नए पुल की जरूरत महसूस की जा रही है। नए पुल के बनने से पुराने पुल पर निर्भरता कम होगी और रेल परिचालन को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।

प्रस्तावित पुल नदी के ऊपर लगभग 800 मीटर लंबा होगा, जबकि दोनों तरफ के संपर्क मार्गों को मिलाकर इसकी कुल लंबाई करीब 1,546 मीटर निर्धारित की गई है। यह पुल मौजूदा रेल पुल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर बनाया जाएगा। इसकी शुरुआत रामबाग क्षेत्र के कोठापार्चा डाट पुल के पास से होगी। इसके बाद मार्ग लाउदर रोड और ईविंग क्रिश्चियन कॉलेज (ECC) के आसपास से गुजरते हुए नैनी में शुआट्स तक पहुंचेगा। इस तरह पुल और उससे जुड़े संपर्क मार्ग प्रयागराज के दोनों हिस्सों के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगे।

नए पुल का निर्माण पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से प्रयागराज तक प्रस्तावित 150 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन परियोजना का हिस्सा है। इस पूरी परियोजना पर लगभग 2,649.44 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। उपलब्ध परियोजना आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक इस पर 1,772.48 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 450 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें से सितंबर 2026 तक 331.13 करोड़ रुपये के कार्य किए जा चुके थे।

तीसरी रेल लाइन परियोजना के तहत कई हिस्सों में काम पूरा हो चुका है और कुछ खंडों पर ट्रेनों का संचालन भी शुरू हो गया है। कुल 150 किलोमीटर में से लगभग 49.53 किलोमीटर हिस्से में तीसरी लाइन तैयार हो चुकी है। इसमें नैनी-छिवकी-करछना, करछना-भीरपुर, गैपुरा-बिरोही, बिरोही-विंध्याचल और नारायणपुर बाजार-जिओनाथपुर जैसे खंड शामिल हैं। इससे रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने की दिशा में प्रगति हुई है।

परियोजना के बाकी हिस्सों को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की योजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिगना-गैपुरा के 7.05 किलोमीटर हिस्से का काम नवंबर 2026 तक और चुनार-कैलाहट के 10 किलोमीटर हिस्से का काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, यमुना पुल से जुड़ा प्रयागराज-नैनी का 9.48 किलोमीटर लंबा रेल खंड वर्ष 2030-31 तक पूरा करने की समयसीमा के अंतर्गत है। रेलवे के अनुसार, नए पुल और तीसरी रेल लाइन के शुरू होने से दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर ट्रेनों की गति और परिचालन क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। इससे आउटर पर ट्रेनों को रोकने की जरूरत कम हो सकती है और रेल यातायात को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इसका लाभ स्थानीय यात्रियों के साथ लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को भी मिल सकता है।

नया यमुना रेल पुल प्रयागराज के रेल बुनियादी ढांचे के विस्तार की महत्वपूर्ण परियोजना है। हालांकि, इसके वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरा होने और रेल परिचालन शुरू होने के बाद ही सामने आएंगे। रेलवे की योजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने में यह पुल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

Advertisement