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दिल्ली के 23 इलाकों में AQI 300 पार,पहले दिन 68.4 लाख रुपये का जुर्माना

वायु गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में बांटा गया है। शून्य से 50 तक AQI को अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बेहद खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। AQI जितना अधिक होता है, हवा में प्रदूषण का स्तर और उससे स्वास्थ्य को होने वाला खतरा उतना ही बढ़ जाता है।

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Gauravshali Bharat News
  • November 2, 2026 10:29 am IST, Published 54 minutes ago

नयी दिल्लीः  दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत से पहले ही प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी की हवा एक बार फिर जहरीली होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि दिवाली के त्योहार में अभी करीब एक सप्ताह का समय बाकी है, लेकिन कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुंच चुका है। रविवार को दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण पिछले दो दिनों से प्रदूषण में कुछ राहत जरूर मिली थी, लेकिन मौसम में बदलाव के साथ हवा की गुणवत्ता फिर बिगड़ गई।

प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए दिल्ली प्रशासन ने विंटर एक्शन प्लान के तहत सख्ती शुरू कर दी है। अभियान के पहले ही दिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई। प्रशासन की ओर से कुल 68.4 लाख रुपये का जुर्माना और पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। इस दौरान करीब 15 हजार वाहनों की जांच की गई। जांच में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने वाले 1,539 वाहनों को दिल्ली की सीमा से वापस भेज दिया गया, जबकि 566 वाहनों के चालान काटे गए। प्रशासन का कहना है कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और अन्य स्रोतों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, रविवार सुबह सात बजे तक दिल्ली का अधिकतम AQI 349 दर्ज किया गया। राजधानी के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया। अक्षरधाम मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों में सबसे अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया। वहीं इंडिया गेट और जनपथ के आसपास भी हवा की गुणवत्ता काफी खराब रही और AQI करीब 335 तक पहुंच गया। राजधानी के लगभग 23 इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के ऊपर दर्ज किया गया।

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि सरकार की ओर से प्रदूषण रोकने के लिए पहले ही कई प्रतिबंध लागू किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने, हवा की गति घटने और वातावरण में प्रदूषक तत्वों के जमा होने से प्रदूषण की समस्या गंभीर हो जाती है। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक गतिविधियां और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने जैसी घटनाएं भी दिल्ली की हवा को प्रभावित करती हैं।

दिवाली से पहले ही प्रदूषण का स्तर बढ़ना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। त्योहार के दौरान पटाखों का इस्तेमाल होने पर हवा की स्थिति और खराब होने की आशंका रहती है। अगर प्रदूषण बढ़ने का मौजूदा सिलसिला जारी रहा तो दिवाली के आसपास राजधानी के कई इलाकों में AQI गंभीर श्रेणी तक पहुंच सकता है। हालांकि, प्रदूषण का वास्तविक स्तर मौसम, हवा की दिशा, गति और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।वायु गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में बांटा गया है। शून्य से 50 तक AQI को अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बेहद खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। AQI जितना अधिक होता है, हवा में प्रदूषण का स्तर और उससे स्वास्थ्य को होने वाला खतरा उतना ही बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, 200 से अधिक AQI होने पर संवेदनशील लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करना चाहिए और खुले में कठिन शारीरिक गतिविधियों से बचना चाहिए।फिलहाल दिल्ली के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिवाली से पहले प्रदूषण पर काबू पाने की है। प्रशासन की कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। राजधानी के लोगों को भी निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने, कूड़ा नहीं जलाने और निर्माण संबंधी नियमों का पालन करने में सहयोग करना होगा। प्रदूषण से निपटने के लिए केवल सरकारी कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि सामूहिक प्रयास भी जरूरी हैं।

 

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