नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में कोल्ड ड्रिंक, पैक्ड जूस और अन्य मीठे पेय लाखों लोगों की पहली पसंद होते हैं। लेकिन अब एक नई वैश्विक रिसर्च ने इन शुगर युक्त पेयों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अध्ययन के अनुसार, नियमित रूप से अधिक मात्रा में मीठे पेय पदार्थों का सेवन कुछ प्रकार के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल संबंध (Association) दर्शाता है, यह साबित नहीं करता कि कोल्ड ड्रिंक सीधे कैंसर का कारण बनती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित जीवनशैली, स्वस्थ खानपान और सीमित मात्रा में मीठे पेय का सेवन कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
क्या कहती है नई ग्लोबल रिसर्च?
रिसर्च के अनुसार प्रतिदिन लगभग 355 मिलीलीटर या उससे अधिक शुगर युक्त पेय का सेवन करने वाले लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा अपेक्षाकृत अधिक देखा गया।
अध्ययन में पाया गया कि ऐसे लोगों में—
अग्नाशय (Pancreatic) कैंसर का जोखिम लगभग 9% अधिक देखा गया।
कोलोरेक्टल (बड़ी आंत) कैंसर का जोखिम लगभग 7% अधिक पाया गया।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि केवल कोल्ड ड्रिंक पीने से कैंसर हो जाएगा। कई अन्य कारण जैसे मोटापा, धूम्रपान, शराब, शारीरिक निष्क्रियता और आनुवंशिक कारक भी कैंसर के जोखिम को प्रभावित करते हैं।
क्यों बढ़ सकती है परेशानी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मीठे पेयों में अत्यधिक मात्रा में चीनी होती है। नियमित सेवन से शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
मोटापा बढ़ना
इंसुलिन रेजिस्टेंस
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा
फैटी लिवर
शरीर में सूजन (Inflammation)
मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक प्रभाव
यही कारण हैं जो लंबे समय में कई गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
केवल कोल्ड ड्रिंक ही नहीं, ये पेय भी हो सकते हैं नुकसानदायक
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक ही नहीं बल्कि कई अन्य शुगर युक्त पेय भी अधिक मात्रा में पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इनमें शामिल हैं—
पैक्ड फ्रूट ड्रिंक
फ्लेवर्ड शुगर ड्रिंक
एनर्जी ड्रिंक
मीठी बोतलबंद चाय
अतिरिक्त चीनी वाले जूस
मीठे मिल्क बेस्ड ड्रिंक
यदि इनका नियमित सेवन किया जाए तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर जमा होती रहती है।
विशेषज्ञों की क्या है सलाह?
डॉक्टरों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कभी-कभार कोल्ड ड्रिंक पीता है तो इससे तुरंत कैंसर होने का खतरा नहीं माना जा सकता। समस्या तब बढ़ती है जब मीठे पेय रोजाना और अधिक मात्रा में सेवन किए जाएं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—
सादा पानी अधिक पिएं।
ताजे फलों का सेवन करें।
बिना चीनी वाले पेय चुनें।
पैक्ड ड्रिंक की जगह घर का बना नींबू पानी या छाछ लें।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम अपनाएं।
क्या बच्चों पर भी पड़ सकता है असर?
बच्चों और किशोरों में कोल्ड ड्रिंक की बढ़ती आदत चिंता का विषय मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन से ही अधिक शुगर का सेवन भविष्य में मोटापा, डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
रिसर्च को समझना भी जरूरी
विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी रिसर्च को सही संदर्भ में समझना आवश्यक है। यह अध्ययन केवल जोखिम के बढ़े हुए संबंध को दर्शाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि कोल्ड ड्रिंक पीने वाला हर व्यक्ति कैंसर से प्रभावित होगा।
कैंसर जैसी बीमारी कई कारणों से विकसित होती है, जिनमें आनुवंशिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े अनेक कारक शामिल हैं।
स्वस्थ जीवनशैली ही सबसे बड़ा बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि लोग नियमित व्यायाम करें, संतुलित भोजन लें, तंबाकू और शराब से दूरी बनाए रखें तथा शुगर युक्त पेयों का सीमित सेवन करें तो कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति के परिवार में कैंसर का इतिहास है या वह लंबे समय से अस्वस्थ जीवनशैली अपना रहा है, तो समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।
नई ग्लोबल रिसर्च ने मीठे पेयों और कुछ प्रकार के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम के बीच संबंध की ओर संकेत किया है। हालांकि यह अध्ययन कारण-और-परिणाम साबित नहीं करता, फिर भी यह स्पष्ट संदेश देता है कि अत्यधिक शुगर युक्त पेयों का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है