नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में रविवार तड़के भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। सुबह लगभग 4 बजकर 14 मिनट पर आए इस भूकंप से कुछ क्षणों के लिए लोगों में हल्की दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology-NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.9 दर्ज की गई, जबकि इसका केंद्र दिल्ली के उत्तरी जिले में जमीन से 8 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
सुबह-सुबह महसूस हुए झटके
रविवार सुबह अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी कई इलाकों में लोगों ने हल्के कंपन को महसूस किया। कुछ लोगों की नींद खुल गई, जबकि कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर भूकंप के झटकों की जानकारी साझा की। हालांकि झटके हल्के होने के कारण अधिकतर लोगों ने इसे सामान्य कंपन के रूप में महसूस किया।
NCS ने दी आधिकारिक जानकारी
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भूकंप सुबह 4:14 बजे दर्ज किया गया। केंद्र के अनुसार इसकी तीव्रता 2.9 रही और इसका केंद्र दिल्ली के उत्तरी हिस्से में 8 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। विशेषज्ञों का कहना है कि कम तीव्रता वाले ऐसे भूकंप सामान्यतः बड़े नुकसान का कारण नहीं बनते, लेकिन यह क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने का संकेत जरूर देते हैं।
किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं
दिल्ली पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार अब तक किसी भवन के क्षतिग्रस्त होने, किसी व्यक्ति के घायल होने या किसी अन्य प्रकार की आपदा की सूचना नहीं मिली है। सभी संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
दिल्ली क्यों महसूस करती है भूकंप?
भूवैज्ञानिकों के अनुसार दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र-4 (Seismic Zone-IV) में स्थित है, जिसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल किया जाता है। दिल्ली के आसपास कई सक्रिय फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं, जिनमें दिल्ली-हरिद्वार रिज, महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट और सोहना फॉल्ट प्रमुख हैं। यही कारण है कि समय-समय पर यहां हल्के या मध्यम तीव्रता के भूकंप महसूस किए जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे भूकंप इस बात का संकेत होते हैं कि धरती के भीतर ऊर्जा लगातार निकलती रहती है। हालांकि यह कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा कि छोटा भूकंप भविष्य में बड़े भूकंप की निश्चित चेतावनी है।
असम और अरुणाचल प्रदेश में भी दर्ज हुई गतिविधि
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि दिल्ली के अलावा असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गईं। हालांकि इन क्षेत्रों में भी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं और वहां समय-समय पर कंपन महसूस किए जाते हैं।
भूकंप आने पर क्या करें?
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार भूकंप आने पर घबराने की बजाय सतर्क रहना सबसे जरूरी है।
यदि घर के अंदर हों तो मजबूत मेज या टेबल के नीचे शरण लें।
खिड़कियों, कांच और भारी फर्नीचर से दूर रहें।
लिफ्ट का उपयोग न करें।
खुले स्थान पर हों तो बिजली के खंभों, पेड़ों और इमारतों से दूरी बनाए रखें।
आफ्टरशॉक की संभावना को देखते हुए सतर्क रहें।
केवल सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी सूचना पर ही भरोसा करें।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप की भविष्यवाणी अभी भी वैज्ञानिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए भूकंप संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से तैयार रहना चाहिए। स्कूलों, कार्यालयों और आवासीय परिसरों में नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करना तथा आपदा प्रबंधन के दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
प्रशासन की अपील
दिल्ली प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें और यदि कहीं किसी तरह की क्षति दिखाई दे तो तुरंत पुलिस, फायर सर्विस या आपदा प्रबंधन विभाग को सूचित करें। फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।
रविवार तड़के दिल्ली में आए 2.9 तीव्रता के भूकंप ने कुछ क्षणों के लिए लोगों को चौंका जरूर दिया, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र लगातार देशभर की भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि घबराने के बजाय जागरूकता, तैयारी और सही जानकारी ही भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।