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UPSC पास के बाद भी IAS ट्रेनिंग में फेल! जानिए क्या हैं नियम

नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। हर वर्ष करीब 10 लाख से अधिक अभ्यर्थी इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ सौ उम्मीदवारों का ही हो पाता है। […]

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  • July 10, 2026 10:30 am IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। हर वर्ष करीब 10 लाख से अधिक अभ्यर्थी इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ सौ उम्मीदवारों का ही हो पाता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर लेने के बाद भी आईएएस अधिकारी बनने का सफर पूरी तरह समाप्त नहीं होता। चयनित अभ्यर्थियों को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है, जहां उनकी शारीरिक क्षमता, बौद्धिक दक्षता, प्रशासनिक समझ और व्यवहारिक कौशल का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है।

हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कम से कम 24 आईएएस प्रोबेशनर एलबीएसएनएए में प्रशिक्षण के दौरान एक या अधिक परीक्षाओं में असफल हुए हैं। इनमें से 14 मामले केवल वर्ष 2025 और 2026 के दौरान सामने आए हैं। इस तथ्य ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि कोई प्रशिक्षु अधिकारी ट्रेनिंग के दौरान फेल हो जाए तो क्या उसकी नौकरी चली जाती है?

यूपीएससी के बाद शुरू होती है असली प्रशासनिक तैयारी

सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के बाद चयनित अधिकारियों को विभिन्न सेवाओं के अनुसार प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। आईएएस अधिकारियों की ट्रेनिंग उत्तराखंड के मसूरी स्थित एलबीएसएनएए में होती है। यह प्रशिक्षण लगभग दो वर्षों तक चलता है, जिसमें कक्षा आधारित अध्ययन, प्रशासनिक कानून, अर्थव्यवस्था, नीति निर्माण, ग्रामीण भ्रमण, भारत दर्शन, फील्ड ट्रेनिंग, शारीरिक अभ्यास और व्यवहारिक मूल्यांकन शामिल होते हैं।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम प्रशासक तैयार करना होता है जो कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी निर्णय ले सकें।

कई स्तरों पर होती है परीक्षा

आईएएस प्रोबेशनरों को प्रशिक्षण के दौरान कई विषयों और गतिविधियों में मूल्यांकन से गुजरना पड़ता है। इनमें लिखित परीक्षा, प्रेजेंटेशन, फील्ड रिपोर्ट, शारीरिक दक्षता, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन जैसे पहलुओं का आकलन किया जाता है।

यदि कोई अधिकारी किसी परीक्षा में अपेक्षित अंक प्राप्त नहीं कर पाता तो उसे तुरंत सेवा से बाहर नहीं किया जाता। उसे दोबारा परीक्षा देने या सुधार का अवसर उपलब्ध कराया जाता है। कई मामलों में अतिरिक्त प्रशिक्षण और विशेष मार्गदर्शन भी दिया जाता है।

क्या ट्रेनिंग में फेल होने पर नौकरी चली जाती है?

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान एक या दो परीक्षाओं में असफल होना सीधे तौर पर नौकरी समाप्त होने का कारण नहीं बनता। अधिकांश मामलों में संबंधित अधिकारी को पुनर्परीक्षा (Re-examination) का अवसर दिया जाता है।

हालांकि यदि कोई प्रशिक्षु लगातार खराब प्रदर्शन करता है, अनुशासनहीनता करता है या बार-बार निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाता, तो उसके मामले की समीक्षा की जाती है। गंभीर परिस्थितियों में केंद्र सरकार और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) आवश्यक निर्णय ले सकते हैं। ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं।

आरटीआई से सामने आए आंकड़े

सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कम से कम 24 आईएएस प्रोबेशनर प्रशिक्षण के दौरान एक या अधिक परीक्षाओं में असफल रहे। इनमें सबसे अधिक 14 मामले वर्ष 2025 और 2026 में दर्ज किए गए। हालांकि अधिकांश प्रशिक्षुओं ने बाद में पुनर्परीक्षा या अतिरिक्त मूल्यांकन के माध्यम से प्रशिक्षण पूरा किया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि एलबीएसएनएए की प्रशिक्षण प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं बल्कि अत्यंत गंभीर और उच्च मानकों पर आधारित होती है।

क्यों कठिन होती है एलबीएसएनएए की ट्रेनिंग?

मसूरी स्थित एलबीएसएनएए को देश की सर्वोच्च प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्था माना जाता है। यहां अधिकारियों को वास्तविक प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाता है, विभिन्न राज्यों का अध्ययन कराया जाता है तथा कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं, वित्तीय प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर व्यावहारिक अनुभव दिया जाता है।

इसके अलावा ट्रैकिंग, खेल, योग, घुड़सवारी और सामूहिक नेतृत्व गतिविधियां भी प्रशिक्षण का हिस्सा होती हैं, ताकि अधिकारी मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम बन सकें।

केवल रैंक नहीं, क्षमता भी होती है महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीएससी में अच्छी रैंक प्राप्त करना महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन एक सफल प्रशासक बनने के लिए व्यवहारिक समझ, नेतृत्व क्षमता, संवेदनशीलता और निर्णय लेने की योग्यता भी उतनी ही आवश्यक होती है। इसी कारण प्रशिक्षण के दौरान केवल लिखित ज्ञान नहीं बल्कि समग्र व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता है।

युवाओं के लिए सीख

यूपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को यह समझना चाहिए कि चयन के बाद भी सीखने की प्रक्रिया जारी रहती है। प्रशासनिक सेवा में सफलता केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन, ईमानदारी और निरंतर सीखने की क्षमता ही एक अधिकारी को उत्कृष्ट बनाती है।

यूपीएससी परीक्षा में सफलता निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन आईएएस अधिकारी बनने का अंतिम पड़ाव एलबीएसएनएए का प्रशिक्षण ही होता है। प्रशिक्षण के दौरान असफल होने पर तुरंत नौकरी समाप्त नहीं होती, बल्कि सुधार और पुनर्परीक्षा के अवसर दिए जाते हैं। हालांकि लगातार खराब प्रदर्शन या गंभीर अनुशासनहीनता की स्थिति में प्रशासनिक कार्रवाई संभव है। इसलिए आईएएस बनने की यात्रा केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं, बल्कि उत्कृष्ट प्रशिक्षण और जिम्मेदार प्रशासनिक क्षमता विकसित करने की भी प्रक्रिया है।

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