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पान मसाला पैकेजिंग पर बड़ा बदलाव, प्लास्टिक पैकेट पर रोक

नई दिल्ली। पान मसाला खरीदने वाले उपभोक्ताओं और इसे बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नियमों को सख्त कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत प्लास्टिक आधारित और प्लास्टिक-लैमिनेटेड पैकेजिंग पर रोक लगाई गई है। इसका सीधा […]

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  • August 11, 2026 9:08 pm IST, Published 54 minutes ago

नई दिल्ली। पान मसाला खरीदने वाले उपभोक्ताओं और इसे बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नियमों को सख्त कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत प्लास्टिक आधारित और प्लास्टिक-लैमिनेटेड पैकेजिंग पर रोक लगाई गई है। इसका सीधा असर बाजार में दिखाई देने वाले छोटे पाउच और पैकेटों पर पड़ सकता है।

प्लास्टिक वाले पैकेट पर अब नहीं बिकेगा पान मसाला

पान मसाला की पैकेजिंग में लंबे समय से अलग-अलग तरह के प्लास्टिक और सिंथेटिक पॉलिमर का इस्तेमाल होता रहा है। नए नियमों के तहत ऐसी पैकेजिंग को लेकर सख्ती की गई है। इनमें पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपिलीन, पॉलीएस्टर और PVC जैसे प्लास्टिक पदार्थों के साथ-साथ सिंथेटिक पॉलिमर, को-पॉलिमर और प्लास्टिक आधारित लैमिनेट शामिल हैं।

FSSAI के नए प्रावधानों का उद्देश्य पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना और वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्री को बढ़ावा देना है। इससे पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को अपनी मौजूदा पैकेजिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।

लैमिनेटेड और मेटलाइज्ड पैकेजिंग पर भी सख्ती

नियमों में केवल साधारण प्लास्टिक पाउच ही निशाने पर नहीं हैं। प्लास्टिक या सिंथेटिक सामग्री से बने लैमिनेट तथा एल्युमिनियम फॉयल या मेटलाइज्ड लेयर वाली पैकेजिंग पर भी प्रावधान लागू किए गए हैं। यानी ऐसी पैकेजिंग, जिसमें प्लास्टिक की परत के साथ दूसरी सामग्री को जोड़कर पाउच तैयार किया जाता है, उसके इस्तेमाल पर भी असर पड़ेगा।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार में पान मसाला की पैकेजिंग का बड़ा हिस्सा मल्टी-लेयर पैकेजिंग पर आधारित रहा है। इस तरह की पैकेजिंग हल्की, सस्ती और नमी से सुरक्षा देने वाली होती है, लेकिन इसके निपटान को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी लंबे समय से उठती रही हैं।

अब किन चीजों से हो सकेगी पैकेजिंग?

नए प्रावधानों में पान मसाला के लिए कागज, पेपर बोर्ड, सेलुलोज या अन्य प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त सामग्री को विकल्प के रूप में रखा गया है। हालांकि इन सामग्रियों में प्लास्टिक, सिंथेटिक पॉलिमर, को-पॉलिमर, लैमिनेट और मेटलाइज्ड लेयर नहीं होनी चाहिए।

इसके अलावा टिन और ग्लास कंटेनर भी अनुमत विकल्पों में शामिल हैं। इसका अर्थ है कि कंपनियां अब ऐसे पैकेजिंग मॉडल विकसित कर सकती हैं जिनमें प्लास्टिक की जगह प्राकृतिक या अन्य निर्धारित सामग्री का इस्तेमाल किया जाए।

कंपनियों के सामने बढ़ सकती है लागत की चुनौती

पैकेजिंग में बदलाव का असर पान मसाला कंपनियों की उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है। अभी बड़ी संख्या में उत्पाद हल्के प्लास्टिक आधारित पाउच में बेचे जाते हैं। नई व्यवस्था में कंपनियों को वैकल्पिक सामग्री, नई पैकेजिंग मशीनरी और उत्पादन प्रक्रिया में निवेश करना पड़ सकता है।

कागज या पेपर बोर्ड आधारित पैकेजिंग को पान मसाला जैसे उत्पाद के लिए नमी और गुणवत्ता की दृष्टि से उपयुक्त बनाना भी कंपनियों के लिए तकनीकी चुनौती हो सकती है। वहीं टिन और ग्लास कंटेनर अपेक्षाकृत भारी होने के कारण लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत को प्रभावित कर सकते हैं।

इस बदलाव के कारण आने वाले समय में कंपनियां अपनी पैकेजिंग तकनीक के साथ-साथ उत्पाद की कीमतों और पैक साइज पर भी पुनर्विचार कर सकती हैं। हालांकि कीमतों में बदलाव होगा या नहीं, यह कंपनियों के लागत ढांचे और बाजार की प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगा।

छोटे पाउच और सैशे पर सबसे ज्यादा असर

पान मसाला बाजार में छोटे सैशे और पाउच बेहद लोकप्रिय हैं। नए नियमों का सबसे स्पष्ट प्रभाव इसी पैकेजिंग श्रेणी में दिखाई दे सकता है। FSSAI के मसौदा प्रावधानों में प्लास्टिक सैशे में गुटखा, तंबाकू और पान मसाला को स्टोर, पैक या बेचने पर रोक से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया था।

इससे कंपनियों को छोटे पैक के लिए भी वैकल्पिक डिजाइन तैयार करने होंगे। बाजार में आने वाले नए पैकेट पहले की तुलना में अलग दिखाई दे सकते हैं और उपभोक्ताओं को भी पैकेजिंग में बदलाव नजर आ सकता है।

क्या तुरंत बदल जाएगा बाजार?

नियमों में बदलाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुकानों पर मौजूद पुराने पैकेटों का क्या होगा और कंपनियां नए पैकेजिंग सिस्टम में कितनी तेजी से बदलाव करेंगी। इस संबंध में अनुपालन और संक्रमण की व्यावहारिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट पर अप्रैल 2026 में पान मसाला की पैकेजिंग से संबंधित संशोधन का मसौदा प्रकाशित किया गया था। उसमें प्राकृतिक सामग्री, टिन और ग्लास को विकल्प के तौर पर प्रस्तावित किया गया था।

अब ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पैकेजिंग नियमों को सख्त किया गया है और प्लास्टिक आधारित तथा प्लास्टिक-लैमिनेटेड पाउच पर रोक की दिशा में नया प्रावधान लागू हुआ है।

पर्यावरण के लिहाज से क्यों अहम है बदलाव?

पान मसाला के छोटे-छोटे पाउच बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने के बाद कचरे के रूप में सामने आते हैं। मल्टी-लेयर प्लास्टिक पैकेजिंग को अलग-अलग सामग्री में विभाजित कर रीसाइकिल करना कठिन हो सकता है। ऐसे में प्लास्टिक-मुक्त पैकेजिंग की दिशा में कदम कचरा प्रबंधन की समस्या को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि केवल पैकेजिंग बदलना पर्याप्त नहीं होगा। नए नियमों का प्रभाव तभी व्यापक होगा जब निर्माता, वितरक, दुकानदार और नियामक सभी स्तरों पर नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें।

उपभोक्ताओं को क्या दिखेगा?

आने वाले समय में पान मसाला के पैकेट पहले से अलग नजर आ सकते हैं। प्लास्टिक की चमकदार मल्टी-लेयर पैकेजिंग की जगह कागज आधारित पैक, टिन कंटेनर या ग्लास जैसे विकल्प बाजार में अधिक दिखाई दे सकते हैं।

फिलहाल इस बदलाव का सबसे बड़ा असर पान मसाला निर्माताओं की पैकेजिंग रणनीति पर पड़ने वाला है। कंपनियों को नए नियमों के अनुरूप पैकेजिंग सामग्री, उत्पादन प्रक्रिया और सप्लाई चेन में बदलाव करना होगा। वहीं उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिनों में पान मसाला का पैकेट बदलना इस पूरे नियामकीय बदलाव का सबसे दिखाई देने वाला असर हो सकता है।

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