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Microsoft ने AI पर लगाई लिमिट! कर्मचारियों को बड़ा झटका?

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अरबों डॉलर का निवेश करने वाली दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Microsoft ने अब अपने ही कर्मचारियों के AI उपयोग पर नई सीमाएं लागू करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दुनियाभर की कंपनियां AI टूल्स के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ा […]

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  • August 7, 2026 11:55 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अरबों डॉलर का निवेश करने वाली दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Microsoft ने अब अपने ही कर्मचारियों के AI उपयोग पर नई सीमाएं लागू करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दुनियाभर की कंपनियां AI टूल्स के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ा रही हैं। Microsoft का यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कंपनी OpenAI की सबसे बड़ी निवेशकों में से एक है और GitHub Copilot, Microsoft Copilot जैसे कई AI उत्पाद विकसित कर चुकी है।

कंपनी के इस निर्णय के बाद अब कर्मचारियों को AI टूल्स का उपयोग पूरी तरह स्वतंत्र रूप से नहीं मिलेगा। प्रत्येक विभाग को निर्धारित AI Token Budget (Token Pool) दिया जाएगा और उसी सीमा के भीतर AI सेवाओं का उपयोग करना होगा। यानी अब जरूरत के अनुसार ही AI टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकेगा और असीमित उपयोग पर रोक रहेगी।

AI उपयोग की लागत बनी बड़ी चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में Microsoft ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई तकनीकों पर भारी निवेश किया है। हालांकि AI मॉडल चलाने की लागत भी लगातार बढ़ रही है। बड़े भाषा मॉडल (LLMs) को संचालित करने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग पावर, GPU संसाधन और ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

इसी वजह से Microsoft अब अपने कर्मचारियों के AI उपयोग पर खर्च को नियंत्रित करना चाहती है। कंपनी का मानना है कि यदि AI संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग किया जाए तो लागत कम होगी और उत्पादकता भी बनी रहेगी।

हर विभाग को मिलेगा निश्चित Token Budget

नई व्यवस्था के तहत कंपनी प्रत्येक विभाग को एक निश्चित AI Token Budget आवंटित करेगी। AI मॉडल में “टोकन” शब्दों या अक्षरों की प्रोसेसिंग की एक इकाई होती है। जितने अधिक टोकन उपयोग होंगे, उतनी ही अधिक लागत आएगी।

अब विभागों को तय सीमा के भीतर ही AI सेवाओं का उपयोग करना होगा। यदि किसी टीम को अतिरिक्त AI संसाधनों की आवश्यकता होगी तो उसके लिए अलग से अनुमति लेनी पड़ सकती है।

GitHub Copilot पर भी रहेगा नियंत्रण

Microsoft ने संकेत दिया है कि GitHub Copilot जैसे AI Coding Assistant का उपयोग भी अब जरूरत के अनुसार किया जाएगा। कर्मचारियों को केवल आवश्यक कार्यों के लिए AI टूल्स इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI का उपयोग केवल वहीं किया जाए जहां वास्तव में उसकी आवश्यकता हो। इससे अनावश्यक खर्च को रोका जा सकेगा।

कर्मचारियों से क्या कहा गया?

रिपोर्ट के अनुसार Microsoft के Executive Vice President जे पारिख ने कर्मचारियों से कहा है कि AI का उपयोग सोच-समझकर करें और हर Token से अधिकतम उत्पादकता प्राप्त करने की कोशिश करें। उन्होंने कर्मचारियों को यह समझाने का प्रयास किया कि AI संसाधन असीमित नहीं हैं और उनका जिम्मेदारी से उपयोग करना जरूरी है।

क्या इसका असर कर्मचारियों पर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य कार्यों पर इसका बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जो टीमें लगातार AI टूल्स का उपयोग करती हैं, उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना पड़ सकता है।

डेवलपर्स, रिसर्च टीम और AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले कर्मचारियों को अपने AI उपयोग की बेहतर योजना बनानी होगी ताकि निर्धारित Token Budget के भीतर काम पूरा किया जा सके।

AI इंडस्ट्री के लिए क्या संकेत?

Microsoft का यह फैसला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में Google, Amazon, Meta और अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी AI उपयोग को लेकर लागत नियंत्रण की रणनीति अपना सकती हैं।

AI तकनीक जितनी तेजी से विकसित हो रही है, उसे चलाने की लागत भी उतनी ही बढ़ रही है। ऐसे में कंपनियां अब केवल AI अपनाने पर नहीं बल्कि उसके कुशल और किफायती उपयोग पर भी ध्यान दे रही हैं।

Microsoft ने AI में किया है बड़ा निवेश

Microsoft ने OpenAI में अरबों डॉलर का निवेश किया है। इसके अलावा कंपनी ने Azure AI, Copilot, GitHub Copilot, Microsoft 365 Copilot और कई अन्य AI उत्पाद विकसित किए हैं।

कंपनी का उद्देश्य AI को हर कार्यस्थल तक पहुंचाना है, लेकिन अब वह यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि AI का उपयोग आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे।

लागत और उत्पादकता के बीच संतुलन

विशेषज्ञों का कहना है कि AI कंपनियों के लिए भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है, लेकिन इसके संचालन की लागत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में Microsoft का यह कदम लागत और उत्पादकता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।

यदि यह मॉडल सफल रहता है तो अन्य कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए AI Token Budget जैसी व्यवस्था लागू कर सकती हैं।

Microsoft का यह फैसला बताता है कि AI का भविष्य केवल नई तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका जिम्मेदारीपूर्ण और किफायती उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। कंपनी कर्मचारियों को AI से दूर नहीं कर रही है, बल्कि उसका उद्देश्य AI संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है। आने वाले समय में यह रणनीति पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए एक नया मानक बन सकती है।

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