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NTA में स्टाफ की भारी कमी! क्या खतरे में हैं बड़ी परीक्षाएं?

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि एजेंसी में स्थायी कर्मचारियों की भारी कमी है। सरकार द्वारा राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों से पता चला है कि करोड़ों अभ्यर्थियों की परीक्षाएं आयोजित […]

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  • July 24, 2026 3:30 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि एजेंसी में स्थायी कर्मचारियों की भारी कमी है। सरकार द्वारा राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों से पता चला है कि करोड़ों अभ्यर्थियों की परीक्षाएं आयोजित करने वाली इस संस्था में स्थायी स्टाफ बेहद सीमित है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब पिछले कुछ वर्षों में NEET-UG, JEE Main, UGC-NET और CUET जैसी परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

राज्यसभा में शिक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में स्थापना के बाद से अब तक NTA ने करीब 6.6 करोड़ से अधिक पंजीकरण स्वीकार किए हैं। इसके बावजूद एजेंसी में स्थायी कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है। वर्तमान में NTA में केवल 24 स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि बड़ी संख्या में कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं।

स्थायी पदों की स्थिति चिंताजनक

सरकार के अनुसार NTA में कुल 39 स्थायी पद स्वीकृत हैं। इनमें से भी केवल 24 पदों पर नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं। शेष पद खाली पड़े हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एजेंसी में डायरेक्टर जनरल, जॉइंट सेक्रेटरी, डायरेक्टर, जॉइंट डायरेक्टर, रिसर्च साइंटिस्ट, डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर और सीनियर सुपरिंटेंडेंट जैसे कई महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इन पदों पर पर्याप्त नियुक्तियां न होने के कारण प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों का अतिरिक्त भार सीमित कर्मचारियों पर पड़ रहा है।

कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग पर बढ़ती निर्भरता

राज्यसभा में दिए गए जवाब के अनुसार NTA अपने नियमित कार्यों के लिए स्थायी कर्मचारियों की बजाय कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग स्टाफ पर अधिक निर्भर है। एजेंसी में लगभग 197 कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट अथवा आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे हैं।

इसके अलावा कई विशेषज्ञ भी अनुबंध के आधार पर नियुक्त किए गए हैं। इनमें कंसल्टेंट, यंग प्रोफेशनल, सीनियर कंसल्टेंट, एडवाइजर और सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर जैसे पद शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के संचालन में अस्थायी कर्मचारियों पर अत्यधिक निर्भरता लंबे समय में चुनौती बन सकती है।

करोड़ों छात्रों की उम्मीदों से जुड़ी है NTA

NTA देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश और पात्रता परीक्षाओं का आयोजन करती है। इनमें NEET-UG, JEE Main, UGC-NET, CUET UG, CUET PG, CMAT, GPAT, AISSEE सहित कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं शामिल हैं।

हर वर्ष लाखों नहीं बल्कि करोड़ों विद्यार्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। इन परीक्षाओं के परिणामों पर छात्रों का भविष्य, उच्च शिक्षा में प्रवेश और करियर निर्भर करता है। ऐसे में एजेंसी के मानव संसाधनों की स्थिति को लेकर उठे सवाल बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

पहले भी विवादों में रही है NTA

पिछले कुछ वर्षों में NTA कई विवादों का सामना कर चुकी है। विशेष रूप से NEET-UG 2024 को लेकर पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स और परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद एजेंसी की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की मांग भी उठी थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एजेंसी के पास पर्याप्त स्थायी और प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं होंगे, तो इतनी बड़ी परीक्षाओं का निष्पक्ष और सुचारु संचालन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि सरकार लगातार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।

सरकार ने क्या कहा?

शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि NTA में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाती हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि एजेंसी अपने कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यकता के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं लेती है।

हालांकि विपक्षी दलों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे इतनी बड़ी परीक्षा प्रणाली चलाना भविष्य में जोखिम पैदा कर सकता है। उनका मानना है कि नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए ताकि परीक्षा संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक मजबूत बन सके।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि NTA जैसी संस्था में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ संस्थागत अनुभव भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। स्थायी कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और संकट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लगातार बढ़ती परीक्षाओं और उम्मीदवारों की संख्या को देखते हुए एजेंसी के ढांचे का विस्तार समय की आवश्यकता बन चुका है।

राज्यसभा में सामने आए आंकड़ों के बाद NTA की कार्यप्रणाली और संसाधनों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार एजेंसी में रिक्त स्थायी पदों को भरने और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाती है।

देशभर के करोड़ों छात्र हर साल NTA द्वारा आयोजित परीक्षाओं में भाग लेते हैं। ऐसे में एजेंसी की प्रशासनिक मजबूती केवल एक संस्थागत मुद्दा नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

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