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ऐतिहासिक वनवासी सांस्कृतिक शोभा यात्रा ने रचा नया इतिहास

देश की राजधानी दिल्ली भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता के एक ऐसे ऐतिहासिक एवं अद्भुत दृश्य की साक्षी बनी, जिसे “जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर” कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश के विभिन्न राज्यों से आए 1 लाख से अधिक वनवासी समाज के लोग पहली बार अपने वन क्षेत्रों से […]

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Gauravshali Bharat News
  • May 24, 2026 5:08 pm IST, Published 54 minutes ago

देश की राजधानी दिल्ली भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता के एक ऐसे ऐतिहासिक एवं अद्भुत दृश्य की साक्षी बनी, जिसे “जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर” कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश के विभिन्न राज्यों से आए 1 लाख से अधिक वनवासी समाज के लोग पहली बार अपने वन क्षेत्रों से निकलकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचे और अपनी पारंपरिक संस्कृति, वेशभूषा, लोक नृत्य, संगीत एवं गौरवशाली विरासत का भव्य प्रदर्शन करते हुए पाँच विशाल सांस्कृतिक शोभा यात्राओं में शामिल हुए।

इस मौके पर आज अजमेरी गेट चौक से लालकिले तक वनवासियों की एक शोभा यात्रा निकाली गई जिसके लिए पूरा पुरानी दिल्ली क्षेत्र भारतीय लोक संस्कृति, रंगों, परंपराओं और उत्सव की जीवंत झलक से सराबोर दिखाई दिया। जहां एक ओर पारंपरिक वेशभूषा में सजे वनवासी बंधुओं के समूह आकर्षण का केंद्र बने, वहीं दूसरी ओर वनवासियों के स्वागत में दिल्ली के लोगों द्वारा आयोजित किए गए ढोल-नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मधुर धुन, लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियां और बैंड-बाजों की स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

अजमेरी गेट चौक से शुरू हुई इस ऐतिहासिक एवं भव्य शोभा यात्रा को *सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल तथा सांसद श्री रामवीर सिंह बिधूड़ी* ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।इस मौके पर दिल्ली के अनेक प्रमुख नागरिकों सहित भाजपा चांदनी चौक जिलाध्यक्ष श्री अरविंद गर्ग मौजूद रहे। यात्रा अजमेरी गेट चौक से बाजार अजमेरी गेट, हौज काजी, चावड़ी बाजार,नई सड़क, घंटा घर तथा चांदनी चौक मेन बाज़ार से होते हुए ऐतिहासिक लाल किले तक पहुंची।

यात्रा मार्ग पर लगभग 70 से अधिक स्थानों पर कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी संगठनों सहित अनेक धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने वनवासी बंधुओं का पुष्प वर्षा कर भावभीना स्वागत किया। जगह-जगह लोगों ने खड़े होकर तालियों एवं जयघोष के साथ इस सांस्कृतिक महासंगम का अभिनंदन किया तथा वनवासियों के स्वागत में पानी से लेकर सॉफ्ट ड्रिंक्स, फलों से लेकर खाद्य वस्तुओं तक के स्टाल जगह जगह लगाकर अपने स्नेह को लुटाया।

शोभा यात्रा में वनवासी समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत प्रदर्शन किया।

चाँदनी चौक से सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि यह आयोजन केवल एक शोभा यात्रा नहीं, बल्कि “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की सांस्कृतिक भावना का विराट उत्सव बनकर उभरा, जिसमें भारत की विविधता, परंपरा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का अनुपम दर्शन हुआ।

उन्होंने कहा की दिल्ली की सड़कों पर आज जो दृश्य दिखाई दिया, वह भारतीय संस्कृति के गौरव, वनवासी समाज की समृद्ध परंपराओं और राष्ट्रीय एकात्मता का ऐसा जीवंत उदाहरण था, जो आने वाले वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में अंकित रहेगा। दृश्यात्मक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक दृष्टि से यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक माना जा रहा है।

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