तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार राजनीति का समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्र्री कझगम (TVK) ने शुरुआती रुझानों में शानदार प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया है। राजनीतिक गलियारों में जिस दावे को पहले सिर्फ चर्चा माना जा रहा था, वह अब हकीकत बनता दिख रहा है।
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) ने पहले ही अनुमान जताया था कि यदि विजय अकेले चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो वे 100 से अधिक सीटें जीत सकते हैं। अब रुझानों में उनकी पार्टी की बढ़त इस दावे को मजबूत करती नजर आ रही है। पीके की रणनीति में जमीनी मुद्दों पर फोकस, युवाओं को जोड़ना और स्पष्ट संदेश देना शामिल रहा, जिसने चुनावी माहौल को पूरी तरह प्रभावित किया।
तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से व्यक्तित्व आधारित रही है। जयललिता, करुणानिधि और एम.के. स्टालिन जैसे नेताओं की तरह विजय ने भी अपनी व्यक्तिगत छवि और जनसंपर्क के दम पर जनता का विश्वास जीतने की कोशिश की। यही वजह है कि पहली बार चुनाव लड़ने के बावजूद उनकी पार्टी ने मजबूत पकड़ बनाई है।
इस चुनाव में युवाओं की भूमिका बेहद अहम रही। 18 से 29 वर्ष के मतदाताओं का बड़ा वर्ग बदलाव की उम्मीद के साथ विजय के समर्थन में सामने आया। रोजगार, विकास और नए नेतृत्व की चाह रखने वाले युवाओं ने इस चुनाव को नया मोड़ दिया।
रणनीति और नेतृत्व के इस मजबूत तालमेल ने तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय खोल दिया है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए विजय के मुख्यमंत्री बनने की संभावना भी मजबूत होती जा रही है। इसी बीच, उनके आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है, जो उनकी बढ़ती राजनीतिक ताकत को दर्शाता है।