नागालैंड के फिल्मकार तेजा रियो की पहली फीचर फिल्म ‘अंग’ ने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के मंच पर अपनी खास पहचान बनाई है। 1960 के दशक के कोन्याक समाज और वहां तेजी से बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म परंपरा, आस्था और बदलती दुनिया के बीच संघर्ष को एक परिवार की कहानी के जरिए सामने लाती है। फिल्म ने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) 2026 में प्लेटफॉर्म प्राइज जीतकर भारत के लिए एक अहम उपलब्धि हासिल की है।
‘अंग’ की कहानी नागालैंड के एक कोन्याक गांव में रहने वाले उम्रदराज सरदार और उसके बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है। पिता अपने समुदाय की पुरानी मान्यताओं और परंपराओं को बचाए रखना चाहता है, जबकि उसका बेटा बदलते समय और नई विचारधाराओं के प्रभाव के बीच अपनी राह तलाशता है। इसी दौरान गांव में अमेरिकी मिशनरियों का आगमन होता है। उनके साथ धार्मिक और सामाजिक बदलाव की नई प्रक्रिया शुरू होती है, जिसका असर समुदाय के जीवन और पारिवारिक रिश्तों पर भी दिखाई देने लगता है।
फिल्म का केंद्र किसी बड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम के बजाय एक ऐसे समाज का अनुभव है, जो अपनी जड़ों और बाहरी प्रभावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। कहानी में परंपरा बनाम आधुनिकता के सवाल के साथ पहचान, पीढ़ियों के बीच सोच का अंतर और विश्वास में बदलाव जैसे विषय उभरते हैं। सरदार के लिए पुरानी मान्यताएं केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि समुदाय की पहचान और जीवन पद्धति का हिस्सा हैं। वहीं नई पीढ़ी के सामने बदलती परिस्थितियों के साथ आगे बढ़ने की चुनौती है।
फिल्म की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी भाषा और सिनेमाई प्रस्तुति शामिल हैं। ‘अंग’ कोन्याक भाषा में बनाई गई है, जिससे कहानी को स्थानीय संस्कृति और पात्रों की अपनी आवाज के साथ प्रस्तुत किया गया है। फिल्म की शूटिंग 16mm फिल्म पर की गई है। इस माध्यम का इस्तेमाल कहानी के समय और स्थान के अनुरूप एक विशिष्ट दृश्यात्मक वातावरण तैयार करता है और दर्शकों को 1960 के दशक के नागालैंड के अनुभव के करीब ले जाने का प्रयास करता है।
तेजा रियो के लिए ‘अंग’ पहली फीचर फिल्म है और इसकी अंतरराष्ट्रीय सफलता उनके निर्देशन करियर की शुरुआत को खास बनाती है। TIFF के प्लेटफॉर्म कार्यक्रम में फिल्म का चयन और उसके बाद प्लेटफॉर्म प्राइज मिलना फिल्म के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पुरस्कार उन फिल्मों और फिल्मकारों को सामने लाने के लिए जाना जाता है जिनमें विशिष्ट सिनेमाई दृष्टिकोण दिखाई देता है।
‘अंग’ की उपलब्धि का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका ऑस्कर से जुड़ना है। TIFF 2026 में प्लेटफॉर्म प्राइज जीतने के कारण फिल्म 2027 के अकादमी अवॉर्ड्स में इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए सीधे पात्रता हासिल करती है। हालांकि पात्रता हासिल करना अंतिम नामांकन की गारंटी नहीं है, लेकिन यह फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान पाने का महत्वपूर्ण अवसर देता है।
नागालैंड की स्थानीय संस्कृति, कोन्याक समुदाय और एक ऐतिहासिक संक्रमण काल को केंद्र में रखकर बनी ‘अंग’ भारतीय सिनेमा की विविधता को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम बन रही है। फिल्म की कहानी किसी एक परिवार तक सीमित न रहकर उस दौर के सामाजिक बदलावों और पहचान से जुड़े सवालों को सामने लाती है। तेजा रियो की यह पहली फीचर फिल्म इस लिहाज से भी उल्लेखनीय है कि यह पूर्वोत्तर भारत की एक स्थानीय कहानी को उसकी अपनी भाषा, परिवेश और सांस्कृतिक संदर्भों के साथ वैश्विक फिल्म मंच तक ले जाती है।