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Google पर कस्टमर केयर नंबर खोजा, महिला ने गंवाए ₹1.91 लाख

राजकोट: ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार नए तरीकों के साथ सामने आ रहे हैं। अब साइबर ठगों ने कस्टमर केयर और रिफंड के नाम पर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। राजकोट की एक 63 वर्षीय रिटायर्ड महिला कथित तौर पर महज ₹175 के रिफंड के चक्कर में साइबर ठगी का शिकार हो […]

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Gauravshali Bharat News
  • August 8, 2026 9:44 pm IST, Published 12 seconds ago

राजकोट: ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार नए तरीकों के साथ सामने आ रहे हैं। अब साइबर ठगों ने कस्टमर केयर और रिफंड के नाम पर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। राजकोट की एक 63 वर्षीय रिटायर्ड महिला कथित तौर पर महज ₹175 के रिफंड के चक्कर में साइबर ठगी का शिकार हो गईं और उनके बैंक खातों से करीब ₹1.91 लाख ट्रांसफर कर लिए गए। मामले में ठगी का तरीका भी ऐसा था, जिसे देखकर ऑनलाइन लेन-देन करने वाले लोगों को सतर्क होने की जरूरत है।

₹175 के रिफंड के लिए Google पर खोजा नंबर

मिली जानकारी के मुताबिक, महिला ने खराब दूध से जुड़े ₹175 के रिफंड के लिए मदद लेने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने Google पर कस्टमर केयर नंबर खोजा। यहीं से कथित साइबर ठगी की शुरुआत हुई।

अक्सर लोग किसी कंपनी, बैंक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सर्विस का कस्टमर केयर नंबर जानने के लिए Google पर सीधे सर्च करते हैं। लेकिन साइबर अपराधी इसी आदत का फायदा उठाकर फर्जी कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर उपलब्ध कराने या लोगों को दूसरे माध्यमों से संपर्क कराने की कोशिश कर सकते हैं।

महिला ने भी कथित तौर पर ऑनलाइन मिले कस्टमर केयर संपर्क के जरिए मदद लेने की कोशिश की। इसके बाद ठगों ने खुद को कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बताकर उनसे संपर्क किया।

WhatsApp और UPI के जरिए बनाया जाल

स्क्रीनशॉट में दी गई जानकारी के अनुसार, कथित फर्जी कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने महिला को WhatsApp और UPI के माध्यम से अपने जाल में फंसाया। रिफंड दिलाने के नाम पर उनसे कुछ प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा गया।

साइबर ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर पीड़ित को भरोसा दिलाने के लिए बैंक, कंपनी या कस्टमर केयर कर्मचारी होने का दावा करते हैं। इसके बाद वे रिफंड, KYC, अकाउंट वेरिफिकेशन या तकनीकी समस्या ठीक करने के नाम पर पीड़ित से मोबाइल पर कोई ऐप या फाइल डाउनलोड करवाने की कोशिश करते हैं।

इस मामले में भी कथित तौर पर महिला को एक APK फाइल भेजी गई। इसके बाद उनके बैंक खातों से रकम ट्रांसफर होने की बात सामने आई है।

APK फाइल ने बढ़ाया खतरा

APK Android Package Kit की फाइल होती है, जिसके जरिए Android फोन में ऐप इंस्टॉल किया जा सकता है। आम तौर पर फोन में ऐप इंस्टॉल करने के लिए आधिकारिक ऐप स्टोर का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

साइबर अपराधी कई बार किसी उपयोगी ऐप, रिफंड ऐप, सपोर्ट ऐप या बैंकिंग सहायता के नाम पर संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करवाने की कोशिश करते हैं। ऐसी फाइल फोन में इंस्टॉल होने के बाद संवेदनशील जानकारी या डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच का खतरा पैदा कर सकती है।

हालांकि किसी विशेष APK ने इस मामले में किस प्रकार काम किया, इसकी तकनीकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती, लेकिन घटना यह जरूर दिखाती है कि अनजान व्यक्ति के कहने पर APK फाइल डाउनलोड करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।

छोटी रकम के रिफंड से शुरू हुई बड़ी ठगी

इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पूरी कथित ठगी की शुरुआत केवल ₹175 के रिफंड से हुई। पीड़ित महिला को उम्मीद थी कि कस्टमर केयर से संपर्क करने के बाद उनकी छोटी रकम वापस मिल जाएगी, लेकिन मामला कथित तौर पर लाखों रुपये के नुकसान तक पहुंच गया।

स्क्रीनशॉट में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, महिला के बैंक खातों से कुल ₹1,91,334 ट्रांसफर किए गए। यानी जिस रकम को वापस लेने के लिए उन्होंने ऑनलाइन मदद तलाश की थी, उसके मुकाबले नुकसान कई गुना अधिक हो गया।

यह घटना उन लोगों के लिए खास चेतावनी है जो किसी छोटे रिफंड या शिकायत के समाधान के लिए जल्दबाजी में इंटरनेट पर मिले नंबरों पर भरोसा कर लेते हैं।

Google पर मिला हर कस्टमर केयर नंबर सही नहीं

किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर खोजते समय सिर्फ Google के सर्च रिजल्ट पर निर्भर रहना सुरक्षित तरीका नहीं है। साइबर ठग फर्जी नंबर, नकली वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट या दूसरे ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों को अपने संपर्क में लेने की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए किसी भी सेवा से जुड़े नंबर की पुष्टि संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, आधिकारिक ऐप या विश्वसनीय दस्तावेज से करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति खुद को कस्टमर केयर कर्मचारी बताकर WhatsApp पर संपर्क करता है और तुरंत कोई ऐप डाउनलोड करने, लिंक खोलने या बैंकिंग प्रक्रिया करने के लिए दबाव डालता है, तो सावधान हो जाना चाहिए।

रिफंड के नाम पर कभी साझा न करें संवेदनशील जानकारी

किसी वैध रिफंड के लिए सामान्य तौर पर ग्राहक से OTP, UPI PIN, ATM PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या स्क्रीन शेयरिंग जैसी संवेदनशील जानकारी नहीं मांगी जानी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति रिफंड दिलाने के नाम पर ऐसी जानकारी मांगता है, तो बातचीत तुरंत रोक देना बेहतर है। इसी तरह किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर Remote Access ऐप या APK इंस्टॉल करने से भी बचना चाहिए।

UPI से भुगतान करते समय यह भी समझना जरूरी है कि UPI PIN पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान को अधिकृत करने के लिए इस्तेमाल होता है। इसलिए रिफंड के नाम पर PIN डालने को कहा जाए तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

बुजुर्गों को बनाते हैं आसान निशाना

ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बुजुर्ग भी तेजी से डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि तकनीकी जानकारी सीमित होने की वजह से वे कभी-कभी साइबर ठगों के लिए आसान निशाना बन सकते हैं।

परिवार के सदस्यों को बुजुर्गों को यह समझाना चाहिए कि बैंक या कस्टमर केयर कर्मचारी बनकर फोन करने वाले हर व्यक्ति पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की स्थिति में पहले परिवार के सदस्य या संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना चाहिए।

क्या करें अगर खाते से पैसे निकल जाएं?

अगर किसी व्यक्ति के बैंक खाते से धोखाधड़ी के जरिए रकम निकल जाती है, तो बिना देरी किए संबंधित बैंक को इसकी सूचना देनी चाहिए। साथ ही उपलब्ध आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत माध्यम पर घटना की जानकारी दर्ज करानी चाहिए।

जितनी जल्दी घटना की जानकारी संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाई जाएगी, उतनी ही जल्दी लेन-देन को लेकर जरूरी कार्रवाई शुरू हो सकती है। पीड़ित को कॉल रिकॉर्ड, WhatsApp चैट, मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजेक्शन विवरण, स्क्रीनशॉट और संदिग्ध APK या लिंक जैसी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

राजकोट की इस कथित साइबर ठगी का मामला एक बार फिर बताता है कि छोटी रकम के रिफंड के लिए भी अनजान कस्टमर केयर नंबर पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। ₹175 वापस पाने की कोशिश में ₹1.91 लाख का नुकसान होने की जानकारी बेहद गंभीर चेतावनी है।

ऑनलाइन किसी सेवा से जुड़ी शिकायत हो तो हमेशा आधिकारिक माध्यम का इस्तेमाल करें। अनजान WhatsApp नंबर, संदिग्ध लिंक, APK फाइल, OTP और UPI PIN से दूरी बनाए रखें। कुछ मिनट की सावधानी लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।

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