मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य सरकार में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इस यात्रा पर सवाल उठाते हुए दिग्विजय सिंह को ‘कालनेमि’ कह दिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं के सनातन धर्म से जुड़े बयानों और उनके पिछले रुख के बीच विरोधाभास दिखाई देता है। मंत्री की यह टिप्पणी दिग्विजय सिंह की अयोध्या तक प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सामने आई।
मीडिया से बातचीत के दौरान धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि जब कांग्रेस के नेता सनातन धर्म की बात करते हैं, तो उन्हें यह बात हास्यास्पद लगती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने अतीत में राम मंदिर, रामसेतु और भगवान राम से जुड़े मुद्दों पर ऐसे सवाल उठाए, जो उनके मौजूदा बयानों से मेल नहीं खाते। मंत्री ने कहा कि राम मंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण मिलने के बावजूद कांग्रेस के नेताओं ने कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार किया था। इसी आधार पर उन्होंने दिग्विजय सिंह के सनातन धर्म से जुड़े अभियान पर कटाक्ष किया।
लोधी ने अपने बयान में दिग्विजय सिंह की तुलना रामायण के पात्र कालनेमि से की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता जब सनातन धर्म की बात करते हैं, तो उन्हें उनमें कालनेमि नजर आता है। यह टिप्पणी मंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। उनके बयान के बाद यात्रा को लेकर सियासी चर्चा तेज होने की संभावना है।
दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन स्थित शिवधाम से उत्तर प्रदेश के अयोध्या में रामलला मंदिर तक ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने की योजना बनाई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह पदयात्रा लगभग 950 किलोमीटर लंबी होगी और इसे पैदल पूरा करने का कार्यक्रम है। यात्रा के दौरान प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर चलने की योजना बताई गई है। इसकी शुरुआत विजयादशमी के दिन प्रस्तावित है।
इस यात्रा के उद्देश्य और उसके राजनीतिक संदेश को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। धर्मेंद्र सिंह लोधी से जब इस पहल के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे हास्यास्पद बताते हुए दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा। मंत्री के बयान में मुख्य रूप से कांग्रेस के पुराने राजनीतिक रुख और अब सनातन धर्म के नाम पर यात्रा निकालने के फैसले के बीच कथित अंतर को मुद्दा बनाया गया।
रामायण में कालनेमि का उल्लेख एक मायावी असुर के रूप में मिलता है। कथा के अनुसार, वह रावण का संबंधी था और लक्ष्मण के मूर्छित होने के बाद संजीवनी बूटी लाने के लिए निकले हनुमान को रोकने की कोशिश करता है। कालनेमि ने छलपूर्वक अपना रूप बदलकर हनुमान को रास्ते से भटकाने का प्रयास किया था, लेकिन हनुमान ने उसकी चाल पहचान ली और उसका वध कर दिया। धार्मिक कथाओं में कालनेमि का चरित्र छल और कपट से जुड़ा माना जाता है। इसी संदर्भ में मंत्री ने इस पात्र का नाम लेकर दिग्विजय सिंह पर राजनीतिक तंज कसा।
हालांकि, दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित यात्रा को लेकर उनका पक्ष और उसका विस्तृत उद्देश्य अलग से सामने आना महत्वपूर्ण होगा। मंत्री के आरोपों को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। राम मंदिर, रामसेतु और सनातन धर्म से संबंधित मुद्दों पर कांग्रेस तथा उसके नेताओं के पूर्व बयानों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में धार्मिक मुद्दों को लेकर जारी बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा सनातन धर्म से जुड़े संदेश के साथ आयोजित किए जाने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि यात्रा की तैयारियों के बीच कांग्रेस की ओर से मंत्री के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी जाती है और यह मुद्दा आगे किस तरह राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता है।