नई दिल्ली | भारत में महिलाओं का नेतृत्व अब केवल कारोबारी घरानों की विरासत तक सीमित नहीं रह गया है। 2026 की कैंडेरे हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स लिस्ट के अनुसार, देश की 117 प्रभावशाली महिलाएं कुल मिलाकर 39 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति और आर्थिक प्रभाव का प्रतिनिधित्व करती हैं। सबसे खास बात यह है कि इनमें 84% यानी 98 महिलाएं सेल्फ-मेड हैं, जिन्होंने अपनी सफलता अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर हासिल की है।
इस वर्ष हुरुन इंडिया ने 12 अलग-अलग कैटेगरी में 117 महिलाओं को शामिल किया है, जबकि 2025 में यह सूची 9 कैटेगरी और 97 महिलाओं तक सीमित थी। इससे स्पष्ट है कि विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व लगातार बढ़ रहा है।
सूची में उद्योग जगत की दिग्गज किरण मजूमदार-शॉ, रोशनी नाडार, फाल्गुनी नायर, निसाबा गोदरेज और प्रिया नायर के साथ-साथ खेल जगत की पीवी सिंधु, मनु भाकर, मैरी कॉम और मीराबाई चानू जैसी खिलाड़ी भी शामिल हैं।
इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार फेय डिसूजा, बरखा दत्त और पालकी शर्मा, लेखिका सुधा मूर्ति और ट्विंकल खन्ना, तथा उद्यमी अनन्या बिड़ला को भी इस सूची में स्थान मिला है।
इस सूची में सबसे कम उम्र की 19 वर्षीय पैरा-आर्चर शीतल देवी हैं, जबकि सबसे वरिष्ठ 86 वर्षीय उद्यमी रजनी बेक्टर शामिल हैं। यह सूची विभिन्न आयु वर्ग और क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को दर्शाती है।
हुरुन इंडिया ने इस सूची में केवल संपत्ति या कारोबार को ही आधार नहीं बनाया, बल्कि बौद्धिक संपदा, नवाचार, सार्वजनिक भागीदारी और सामाजिक प्रभाव को भी प्रमुख मानदंड माना है।
इसी वजह से 20 ओलंपिक और पैरालंपिक पदक विजेता महिलाएं इस सूची की सबसे बड़ी श्रेणी बनकर उभरी हैं। इनमें लगभग 60% पैरा-एथलीट शामिल हैं।
हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने कहा कि सूची में शामिल 98 महिलाओं ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर सफलता हासिल की है, जबकि केवल 19 महिलाएं पारिवारिक विरासत के आधार पर इस मुकाम तक पहुंची हैं।
उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में नेतृत्व और सफलता अब विरासत से अधिक मेहनत, नवाचार और योग्यता के आधार पर हासिल की जा रही है।