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नेपाल बाढ़ में 290 भारतीय लापता, सरकार ने राहत अभियान तेज किया

नेपाल के रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा का असर वहां मौजूद भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में भारतीयों से अभी तक संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 288 से 290 […]

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  • August 28, 2026 10:34 am IST, Published 54 minutes ago

नेपाल के रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा का असर वहां मौजूद भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में भारतीयों से अभी तक संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 288 से 290 भारतीय नागरिकों के परिजनों और संबंधित एजेंसियों को अब तक उनकी स्थिति की जानकारी नहीं मिल पाई है। लापता लोगों में नेपाल की त्रिशूली क्षेत्र स्थित पावर परियोजना में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भी शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे भारतीय तीर्थयात्रियों के भी कई समूह इस आपदा के बाद प्रभावित बताए जा रहे हैं। तमिलनाडु से गए दो अलग-अलग समूहों के यात्रियों की स्थिति को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। ऐसे में भारत सरकार ने नेपाल में फंसे और लापता भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बचाव और राहत प्रयास तेज कर दिए हैं।

भारत ने इस संकट की घड़ी में नेपाल को हरसंभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर पूरे राहत और बचाव अभियान की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय के अधिकारियों तथा काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारतीय राजनयिकों के साथ समीक्षा की है। बैठक का उद्देश्य अलग-अलग स्तर पर चल रहे प्रयासों के बीच बेहतर तालमेल बनाना और प्रभावित भारतीय नागरिकों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाना है।

विदेश मंत्रालय के स्तर पर नेपाल सरकार, संबंधित भारतीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, यात्रा संचालकों और परियोजना अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है। भारतीय दूतावास भी स्थानीय प्रशासन तथा परियोजना प्रबंधन से जानकारी जुटाने में लगा है। हालांकि आपदा प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण जमीन पर मौजूद लोगों से सीधा संपर्क स्थापित करना बड़ी चुनौती बन गया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, मौजूदा जानकारी में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। त्रिशूली-1 परियोजना में कार्यरत 73 भारतीय भी इसी सूची में शामिल हैं। भारतीय दूतावास परियोजना के अधिकारियों से संपर्क कर इन कर्मचारियों के बारे में अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। प्रभावित इलाके में संचार व्यवस्था ठप होने से सूचनाओं का आदान-प्रदान मुश्किल हो रहा है।

आपदा के बाद राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारत ने भी तत्काल कदम उठाए हैं। भारतीय वायुसेना का सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान बुधवार रात ही राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा। इस खेप में अस्थायी आश्रय के सामान, कंबल, स्वच्छता संबंधी किट, सौर ऊर्जा से चलने वाले लैंप और जरूरी दवाएं शामिल थीं। इसके बाद गुरुवार को एक और विमान के जरिए बड़ी मात्रा में मानवीय सहायता, दवाइयां और खाद्य सामग्री नेपाल भेजी गई।

अब तक भारत की ओर से लगभग 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है और जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता भेजने की तैयारी जारी है। हालांकि प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना आसान नहीं है। रसुवा, नुवाकोट और बिदुर जैसे क्षेत्रों में बाढ़ के साथ आए मलबे ने सड़क मार्ग और स्थानीय संपर्क व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। कई गांवों, दुकानों और बाजार क्षेत्रों में कीचड़ और मलबा जमा है।

ऐसे में राहत एवं बचाव कार्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित स्थानों तक पहुंच बनाना है। स्थानीय स्तर पर मलबा हटाना और रास्तों को बहाल करना प्राथमिकता बन गया है। भारत और नेपाल के अधिकारी लगातार स्थिति का आकलन कर रहे हैं ताकि फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाई जा सके और लापता भारतीय नागरिकों की जानकारी जल्द से जल्द हासिल की जा सके।

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