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व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बीच भारत ने ईरानी राजनयिकों को किया तलब

नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में कमर्शियल जहाजों पर हाल के हमलों को लेकर भारत ने कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर अपनी गंभीर चिंता से अवगत कराया। तलब किए गए अधिकारियों में ईरानी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन मोहम्मद जवाद होसैनी […]

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  • July 14, 2026 1:00 pm IST, Published 57 minutes ago

नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में कमर्शियल जहाजों पर हाल के हमलों को लेकर भारत ने कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर अपनी गंभीर चिंता से अवगत कराया। तलब किए गए अधिकारियों में ईरानी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन मोहम्मद जवाद होसैनी भी शामिल थे। भारत ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने ईरानी प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में हाल के समुद्री घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। भारत ने यह भी दोहराया कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की अस्थिरता से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है।

भारत का यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्रों में तनाव लगातार बना हुआ है। हाल के दिनों में कई कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने दुनिया के अनेक देशों की चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है।

बैठक के दौरान भारतीय पक्ष ने उम्मीद जताई कि क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्ष रचनात्मक भूमिका निभाएंगे। साथ ही भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री नियमों का पालन हर देश की जिम्मेदारी है।

भारत के लिए पश्चिम एशिया का समुद्री क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। देश के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है। इसके अलावा भारतीय व्यापारिक जहाज और हजारों भारतीय नाविक भी इन समुद्री मार्गों का नियमित उपयोग करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की असुरक्षा भारत के आर्थिक हितों को सीधे प्रभावित कर सकती है।

भारत का यह कूटनीतिक संदेश केवल चिंता व्यक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर उसकी गंभीरता को भी दर्शाता है। भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि समुद्री मार्ग सुरक्षित, खुले और नियम-आधारित होने चाहिए ताकि वैश्विक व्यापार बिना किसी बाधा के चलता रहे।

विदेश मंत्रालय की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि भारत क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों तथा व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान निकालने की अपील की है।

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