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शशि थरूर की किताब पर राजनयिक परिवारों से संवाद, महाभारत पर चर्चा

शशि थरूर राजनीति के साथ-साथ लेखन और सार्वजनिक संवाद के लिए भी पहचाने जाते हैं। वह इतिहास, समाज, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों पर अपनी राय रखते रहे हैं। उनकी साहित्यिक गतिविधियां भी अक्सर चर्चा में रहती हैं। दिल्ली में हुई यह मुलाकात इसी बात का उदाहरण रही कि उनकी किताबों को लेकर पाठकों में अब भी दिलचस्पी बनी हुई है।

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  • October 23, 2026 5:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद और लेखक  शशि थरूर ने अपनी चर्चित किताब ‘द ग्रेट इंडियन नॉवेल’ को लेकर दिल्ली में आयोजित एक विशेष चर्चा का अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को राजनयिकों के परिवारों से जुड़े सदस्यों के साथ उनकी साहित्यिक बातचीत हुई, जिसमें किताब के कथानक, उसके विचारों और भारतीय इतिहास से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की गई। थरूर ने इस मुलाकात को सुखद बताते हुए कहा कि पाठकों के सवालों और उनके अलग-अलग नजरियों से किसी लेखक को अपनी रचना को नए सिरे से समझने का अवसर मिलता है।

तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विदेश मामलों से जुड़े संगठन के सदस्यों और मिशन प्रमुखों की पत्नियों के साथ उनकी किताब पर बातचीत हुई। थरूर ने राजनयिक समुदाय के इन सदस्यों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें दिल्ली में राजनयिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया। कार्यक्रम में 75 से अधिक लोगों की मौजूदगी रही और चर्चा के दौरान किताब से जुड़े कई रोचक सवाल सामने आए। इस बातचीत का संचालन डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर की पत्नी आराधना कपूर ने किया। थरूर के मुताबिक, पाठकों ने उनकी रचना को लेकर विचारपूर्ण सवाल पूछे और अपने दृष्टिकोण साझा किए।

उन्होंने कहा कि जब पाठक किसी किताब को पढ़कर उस पर गंभीरता से विचार करते हैं, तो लेखक के लिए यह अनुभव खास बन जाता है। पाठकों की प्रतिक्रियाएं किसी रचना के उन पहलुओं को भी सामने लाती हैं, जिन पर लिखते समय लेखक ने शायद अलग ढंग से विचार किया हो। कार्यक्रम के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी की पत्नी डॉली मिसरी की ओर से दोपहर के भोजन का आयोजन किया गया। थरूर ने इस आयोजन के लिए आभार जताते हुए गर्मजोशी भरे आतिथ्य और बातचीत के माहौल का उल्लेख किया। इस अवसर पर किताबों पर हस्ताक्षर करने और लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाने का मौका भी मिला। उन्होंने कहा कि लेखक के लिए सबसे बड़ी संतुष्टि यह जानना है कि उसकी लिखी रचना लोग पढ़ रहे हैं और उससे जुड़कर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।

‘द ग्रेट इंडियन नॉवेल’ शशि थरूर की प्रमुख साहित्यिक कृतियों में गिनी जाती है। वर्ष 1989 में प्रकाशित इस व्यंग्यात्मक उपन्यास में भारतीय महाकाव्य महाभारत की कथा को आधुनिक भारतीय इतिहास के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने महाभारत के पात्रों और घटनाओं के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन तथा आजादी के बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों को एक अलग साहित्यिक रूप दिया है। इस रचना में इतिहास, राजनीति, पौराणिक कथाओं और व्यंग्य का मेल देखने को मिलता है। उपन्यास की खासियत यह है कि इसमें महाभारत की परिचित कथा को भारतीय राजनीति और ऐतिहासिक परिस्थितियों से जोड़कर नए अर्थ दिए गए हैं।

इसके पात्रों और घटनाओं के जरिए सत्ता, राजनीतिक महत्वाकांक्षा, सामाजिक बदलाव और राष्ट्रीय जीवन के विभिन्न पहलुओं पर व्यंग्य किया गया है। इस वजह से यह किताब साहित्य और राजनीति में रुचि रखने वाले पाठकों के बीच चर्चा का विषय बनी रही है। शशि थरूर राजनीति के साथ-साथ लेखन और सार्वजनिक संवाद के लिए भी पहचाने जाते हैं। वह इतिहास, समाज, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों पर अपनी राय रखते रहे हैं। उनकी साहित्यिक गतिविधियां भी अक्सर चर्चा में रहती हैं। दिल्ली में हुई यह मुलाकात इसी बात का उदाहरण रही कि उनकी किताबों को लेकर पाठकों में अब भी दिलचस्पी बनी हुई है।

थरूर ने इस अनुभव के जरिए पाठकों के साथ सीधे संवाद के महत्व को भी रेखांकित किया। उनके लिए यह मुलाकात केवल एक पुस्तक चर्चा नहीं, बल्कि अपनी रचना को पढ़ने वाले लोगों के विचार जानने का अवसर भी रही। साहित्यिक संवाद के ऐसे आयोजन लेखकों और पाठकों के बीच संबंध मजबूत करने के साथ-साथ भारतीय इतिहास और संस्कृति पर नए नजरिए विकसित करने में भी मदद करते हैं।

 

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