नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को देश की तकनीकी, औद्योगिक और बुनियादी ढांचा क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी। इनमें सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम, नई मोबाइल PLI योजना, राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 के तहत नए यूरिया प्लांट और वाराणसी में दो बड़े सड़क कॉरिडोर शामिल हैं।
कैबिनेट ने सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर की पूरी सप्लाई चेन विकसित करना है, ताकि देश चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बन सके।
इस कार्यक्रम के तहत मिसाइल, ड्रोन, टैंक, युद्धपोत, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कैमरा, एक्स-रे मशीन सहित कई महत्वपूर्ण उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। साथ ही चिप निर्माण के लिए जरूरी मशीनें, विशेष रसायन (केमिकल) और 50 से अधिक प्रकार की औद्योगिक गैसों का भी घरेलू स्तर पर उत्पादन किया जाएगा।
कैबिनेट ने 62,500 करोड़ रुपये की नई मोबाइल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को भी मंजूरी दी है। यह योजना 2030-31 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य भारत को मोबाइल निर्माण और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 के तहत देश में 9 नए गैस आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर हर साल 1 करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित होगी, जिससे किसानों को खाद की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
कैबिनेट ने वाराणसी में दो महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है।
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने से वाराणसी में यातायात सुगम होगा और लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बीएचयू और काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
कैबिनेट ने ओडिशा के पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड के दोहरीकरण और झारखंड-ओडिशा के राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी रेल लाइन बिछाने की मंजूरी भी दी है।
इन दोनों रेलवे परियोजनाओं पर कुल 3,907 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी, रेल नेटवर्क मजबूत होगा और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।