पटना: निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भरत तिवारी के परिवार की आर्थिक मदद को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच सरकार और नेताओं पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि भरत तिवारी के परिवार को सरकारी स्तर पर किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली और परिवार की ओर से भी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की गई है।
पप्पू यादव ने कहा कि भरत तिवारी की पत्नी और उनकी मां की ओर से मदद को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। सांसद के मुताबिक, परिवार की ओर से यह कहा गया है कि उन्हें सहायता के नाम पर एक रुपया भी प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति करने वाले नेताओं पर भी सवाल उठाए।
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक लोगों ने भरत तिवारी के परिवार की मदद करने के बजाय इस मामले को राजनीतिक बयानबाजी का विषय बना दिया। उन्होंने कहा कि किसी परिवार के दुख और संकट को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। पप्पू यादव ने कहा कि शहीद या दिवंगत व्यक्ति के परिवार की स्थिति को समझना और उनकी जरूरत के समय मदद करना सभी की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
पप्पू यादव ने नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को ऐसे संवेदनशील मामलों में बयान देने से पहले तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले परिवार के सामने कुछ बातें कही गईं और बाद में सार्वजनिक रूप से अलग दावे किए गए। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता या संगठन ने सहायता की है तो उसका रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।
पप्पू यादव ने इस विवाद को परशुराम समाज से जोड़कर की गई कथित बयानबाजी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत तिवारी के परिवार को लेकर की गई राजनीतिक टिप्पणियों से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि किसी समुदाय या समाज की भावनाओं को राजनीतिक बहस में खींचना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इस पूरे मामले में सबसे पहले परिवार की भावनाओं और सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए। पप्पू यादव ने कहा कि यदि किसी नेता या राजनीतिक समूह की ओर से परिवार को लेकर गलत बयान दिया गया है, तो उन्हें अपनी बात वापस लेकर माफी मांगनी चाहिए।
पप्पू यादव ने एक बार फिर दावा किया कि भरत तिवारी के परिवार को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में परिवार की ओर से कही गई बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और यदि कोई सरकारी सहायता दी गई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। यदि सरकारी स्तर पर कोई सहायता स्वीकृत या जारी की गई है, तो उसके दस्तावेज और विवरण सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल पप्पू यादव के बयान ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों से अपील की कि ऐसे मामलों में बयानबाजी से ज्यादा जरूरी पीड़ित परिवार की वास्तविक मदद और उसके सम्मान की रक्षा करना है।