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ईंधन बाजार में बड़ा अपडेट, डीजल और ATF पर बढ़ा टैक्स

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े विंडफॉल टैक्स में संशोधन किया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की है, जबकि पेट्रोल पर लागू टैक्स में कमी की […]

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  • July 16, 2026 3:57 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े विंडफॉल टैक्स में संशोधन किया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की है, जबकि पेट्रोल पर लागू टैक्स में कमी की गई है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, एटीएफ के निर्यात पर 7.50 रुपये प्रति लीटर का टैक्स निर्धारित किया गया है। दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात पर लागू विंडफॉल टैक्स में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से तेल उत्पादक कंपनियों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसी अतिरिक्त लाभ के एक हिस्से को सरकार विंडफॉल टैक्स के रूप में वसूलती है।

विंडफॉल टैक्स वह विशेष कर है, जो तेल उत्पादक और निर्यातक कंपनियों पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में असामान्य रूप से बढ़ी कीमतों के कारण कंपनियों को होने वाले अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा सरकारी राजस्व में शामिल करना होता है। यह टैक्स सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं लगाया जाता, बल्कि निर्यात करने वाली कंपनियों पर लागू होता है।

सरकार समय-समय पर वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इस टैक्स की समीक्षा करती रहती है। जब कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है, तब विंडफॉल टैक्स में संशोधन किया जाता है ताकि अतिरिक्त लाभ का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विंडफॉल टैक्स में बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत कोई परिवर्तन होगा। फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की मौजूदा कीमतें पहले की तरह बनी हुई हैं।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव होता है, तो सरकार विंडफॉल टैक्स की दोबारा समीक्षा कर सकती है। सरकार के इस फैसले पर अब तेल उद्योग और बाजार की नजर बनी हुई है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम आगे किस दिशा में जाते हैं और उनका घरेलू ऊर्जा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है।

 

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