नयी दिल्लीः संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था, वैश्विक परिस्थितियों और संसद की भूमिका पर अपनी बात रखते हुए कहा कि दुनिया लगातार अस्थिर दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं, जिनका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, लेकिन भारत ने इन चुनौतियों के बीच भी मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का प्रभाव भारत पर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि इस स्थिति के कारण आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार, ऊर्जा और अन्य कई क्षेत्रों में चुनौतियां सामने आईं, जिससे अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न हुईं। इसके बावजूद भारत ने मजबूती के साथ आगे बढ़ते हुए 7.7 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर दर्ज की।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की आर्थिक क्षमता, नीतिगत स्थिरता और देशवासियों के सामूहिक प्रयासों का प्रमाण है। प्रधानमंत्री के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने विकास की रफ्तार बनाए रखी और दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति को और मजबूत किया।
प्रधानमंत्री ने संसद के मानसून सत्र को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से सकारात्मक और सार्थक चर्चा की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि संसद में जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर विमर्श होना चाहिए, ताकि देश के विकास और जनता के कल्याण से जुड़े निर्णय प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकें।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत को आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है। उनके अनुसार, चुनौतियों के बीच विकास की गति बनाए रखना भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।