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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताशकंद, उज़्बेकिस्तान के लिए रवाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद के लिए रवाना हुए। उनकी यह यात्रा भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे। दोनों देशों के […]

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  • August 29, 2026 10:17 am IST, Published 1 hour ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद के लिए रवाना हुए। उनकी यह यात्रा भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली इस बैठक में मौजूदा सहयोग की समीक्षा के साथ भविष्य की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।

भारत और उज़्बेकिस्तान के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में कई क्षेत्रों में विस्तार देखने को मिला है। दोनों देश राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर लगातार संपर्क में रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ताशकंद यात्रा का प्रमुख उद्देश्य इसी साझेदारी को और मजबूत करना है। वार्ता के दौरान दोनों पक्ष आपसी हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे और सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में व्यापार और निवेश प्रमुख विषयों में शामिल रहेगा। भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच आर्थिक रिश्तों को बढ़ाने की दिशा में दोनों देश नए रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं। व्यापारिक गतिविधियों को आसान बनाने, निवेश के अवसर बढ़ाने और निजी क्षेत्र के बीच संपर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा सकता है। दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को विस्तार देने से आर्थिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी प्रधानमंत्री की यात्रा के महत्वपूर्ण एजेंडे में रहेगा। बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच भारत मध्य एशियाई देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को महत्व देता रहा है। बातचीत में रक्षा क्षेत्र में मौजूदा सहयोग, प्रशिक्षण, सैन्य संपर्क और सुरक्षा से जुड़े साझा हितों पर चर्चा हो सकती है।

डिजिटल कनेक्टिविटी एक अन्य अहम क्षेत्र है। भारत ने डिजिटल तकनीक, डिजिटल भुगतान और सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को विकसित किया है। ऐसे में दोनों देश तकनीकी सहयोग, डिजिटल सेवाओं और नवाचार से जुड़े अवसरों पर विचार कर सकते हैं। डिजिटल क्षेत्र में साझेदारी दोनों देशों के नागरिकों और व्यवसायों के बीच संपर्क को और आसान बनाने में भूमिका निभा सकती है।

ऊर्जा क्षेत्र भी बातचीत के एजेंडे में अहम स्थान रखेगा। मध्य एशिया में ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता और क्षेत्रीय संपर्क को देखते हुए भारत के लिए उज़्बेकिस्तान के साथ ऊर्जा सहयोग महत्वपूर्ण है। दोनों पक्ष ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।

शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना भी द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। दोनों देशों के बीच शैक्षणिक संस्थानों, छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के संपर्क को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। सांस्कृतिक और मानवीय रिश्तों को मजबूत करने से दोनों देशों के बीच लंबे समय की साझेदारी को और आधार मिल सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होने की संभावना है। मध्य एशिया भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और उज़्बेकिस्तान इस क्षेत्र का एक प्रमुख साझेदार है। ऐसे में ताशकंद में होने वाली बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग से जुड़े मुद्दों को भी इसमें स्थान मिल सकता है।

यात्रा के दौरान दोनों नेता सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की प्रगति की समीक्षा करेंगे और आने वाले समय के लिए प्राथमिकताएं तय कर सकते हैं। इससे भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों में नए समझौतों और संयुक्त पहलों का रास्ता खुल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की ताशकंद यात्रा को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

 

 

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