नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज करने और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश जारी करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता और दोषियों को कानून के तहत कठोर दंड दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार के इस फैसले पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। संगठन ने कहा कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा और वह अपनी प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा। CJP की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई गई है।
Dharmendra Pradhan Must Resign
धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना होगा https://t.co/0XShqJ6FVG
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 23, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि पेपर लीक का मुद्दा किसी एक राज्य या किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के छात्रों और अभिभावकों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के मन में कानून का डर पैदा हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
सरकार की ओर से कहा गया है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा प्रक्रिया में सुधार किए जा रहे हैं। हाल के समय में पेपर लीक के मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों के बीच चिंता पैदा की है, जिसके बाद परीक्षा सुरक्षा, जांच व्यवस्था और कानूनी कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं।
फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इसके जरिए लंबी न्यायिक प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने और दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश होगी।
वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि केवल कार्रवाई नहीं बल्कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। उनका जोर जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर है।