नई दिल्ली। मेघालय के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी है। अदालत ने निर्देश दिया कि वह तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करे। मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने केवल कानूनी पहलुओं पर ही नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक परिवेश, न्यूक्लियर फैमिली, डिजिटल जीवनशैली और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आधुनिक दौर की युवा पीढ़ी के पास जानकारी पहले की तुलना में अधिक है, लेकिन जीवन के दबाव और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता पहले जैसी मजबूत नहीं दिखाई देती। न्यायालय ने कहा कि आज की पीढ़ी त्वरित समाधान चाहती है और छोटी-छोटी परेशानियों से भी आसानी से निराश हो जाती है।
अदालत ने संयुक्त परिवार और एकल परिवार की सामाजिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि संयुक्त परिवार में रहने वाले बच्चों और युवाओं को विभिन्न परिस्थितियों में सामंजस्य बैठाना, धैर्य रखना और रिश्तों को समझना सीखने का अवसर मिलता है। वहीं, बदलती पारिवारिक व्यवस्था में कई बार सामाजिक संवाद सीमित हो जाता है, जिसका असर व्यवहार और मानसिक संतुलन पर पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान गैजेट्स के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। अदालत ने कहा कि कई बार बच्चों को भावनात्मक सहयोग देने के बजाय उन्हें मोबाइल या अन्य डिजिटल उपकरण थमा दिए जाते हैं। इससे उनका सामाजिक और भावनात्मक विकास प्रभावित हो सकता है। न्यायालय ने परिवारों में संवाद, सहभागिता और मानवीय संबंधों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
मामले के कानूनी पक्ष पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत रद्द कर दी और तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। यह मामला मेघालय में हनीमून के दौरान हुई राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है, जिसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।