नई दिल्ली: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने विमान ईंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्थिति साफ करते हुए कहा है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में इथेनॉल मिलाने की सरकार की कोई योजना नहीं है। उन्होंने ऐसी खबरों को पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि इससे यात्रियों के बीच अनावश्यक चिंता पैदा हो सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) दो अलग-अलग ईंधन हैं और दोनों को एक जैसा समझना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि SAF एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एविएशन फ्यूल है, जिसे विमानन क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल विकल्प के तौर पर विकसित किया गया है।
राम मोहन नायडू ने कहा कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार के ईंधन को विमानों में इस्तेमाल करने से पहले उसे कई स्तरों के परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और सरकार विमानन व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है।
मंत्री ने बताया कि सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) सहित वैश्विक विमानन संस्थाओं की मान्यता प्राप्त है। यह ईंधन पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है और दुनियाभर के कई देशों में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इथेनॉल मुख्य रूप से सड़क परिवहन क्षेत्र में पेट्रोल के साथ मिश्रण के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि विमानन ईंधन की अपनी अलग तकनीकी आवश्यकताएं और सुरक्षा मानक होते हैं। इसलिए दोनों ईंधनों को जोड़कर देखना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
हाल के दिनों में विमानन ईंधन को लेकर कुछ दावे सामने आए थे, जिनमें कहा गया था कि सरकार ATF में इथेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है। इन दावों के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ने कहा कि ऐसी भ्रामक जानकारी से हवाई यात्रियों में डर और भ्रम पैदा हो सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विमानन सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। सरकार का उद्देश्य देश के विमानन क्षेत्र को मजबूत बनाना और यात्रियों को सुरक्षित एवं बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
भारत में विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में ईंधन, सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। सरकार जहां एक ओर विमानन क्षेत्र की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है, वहीं दूसरी ओर भविष्य के लिए टिकाऊ ऊर्जा विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है।
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल को भविष्य के हरित विमानन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि इसका इस्तेमाल तय मानकों और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर ही किया जाता है। केंद्रीय मंत्री के बयान से यह साफ हो गया है कि फिलहाल ATF में इथेनॉल मिलाने की कोई योजना नहीं है।
मंत्रालय ने दोहराया कि विमान यात्रियों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और विमानन क्षेत्र में किसी भी फैसले को अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैज्ञानिक मानकों के आधार पर ही लागू किया जाएगा।