नयी दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटने का फैसला किया था। अब उन्होंने अपने इस्तीफे की प्रति सार्वजनिक करते हुए पार्टी संगठन से पूरी तरह अलग होने की घोषणा की है। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पूनावाला ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफे में उन्होंने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले करीब पांच वर्षों के दौरान उन्हें संगठन की ओर से मार्गदर्शन, सम्मान और काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि वह पार्टी में बिताए समय और मिली जिम्मेदारियों के लिए हमेशा आभारी रहेंगे।
अपने पत्र में पूनावाला ने यह भी बताया कि पार्टी की ओर से उनका इस्तीफा तत्काल स्वीकार नहीं किया गया था। उन्हें अपने निर्णय पर दोबारा विचार करने के लिए कहा गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि काफी विचार-विमर्श और गंभीर आत्ममंथन के बाद उन्होंने अपना फैसला अंतिम रूप से लिया। पूनावाला ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद के साथ-साथ बीजेपी की सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से भी मुक्त होने की इच्छा जताई। उनका कहना है कि यह फैसला उन्होंने जल्दबाजी में नहीं लिया, बल्कि व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लंबे विचार के बाद लिया है।
Resignation Letter.
With utmost humility, sense of affection & gratitude i have once again submitted my resignation letter to @BJP4India & Hon’ble Shri @NitinNabin ji & have requested that the same be accepted.
Eternally grateful for guidance, love, respect and platform that… pic.twitter.com/yUvyJiWNdX
— Shehzad Jai Hind (@Shehzad_Ind) August 17, 2026
इस्तीफे में उन्होंने अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह पसमांदा मुस्लिम समुदाय से आते हैं और उनका किसी राजनीतिक परिवार से संबंध नहीं रहा है। इसके बावजूद बीजेपी में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और सार्वजनिक मंच मिला। उन्होंने इसे अपने लिए पार्टी की एक महत्वपूर्ण विशेषता बताया और कहा कि वह इसके लिए संगठन के आभारी रहेंगे।
पूनावाला ने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी से संगठनात्मक रूप से अलग होने का अर्थ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या पार्टी की विचारधारा से पूरी तरह दूरी बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह निजी क्षेत्र में करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण उन्होंने निजी क्षेत्र में जाने का फैसला किया है। शहजाद पूनावाला बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने के लिए जाने जाते रहे हैं। टेलीविजन बहसों और सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता के कारण वह पार्टी के प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में शामिल रहे।
पूनावाला के इस्तीफे से बीजेपी के साथ उनका करीब पांच वर्ष का संगठनात्मक सफर समाप्त हो गया है। उन्होंने जिस तरह पार्टी छोड़ते समय भी प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के दृष्टिकोण के प्रति समर्थन व्यक्त किया है, उससे उनका संदेश स्पष्ट है कि संगठन से दूरी और वैचारिक समर्थन को वह अलग-अलग मानते हैं।
अब नजर इस बात पर होगी कि निजी क्षेत्र में जाने के बाद पूनावाला की सार्वजनिक और राजनीतिक भूमिका किस रूप में सामने आती है। फिलहाल उनका इस्तीफा बीजेपी के राजनीतिक और मीडिया गलियारों में एक अहम घटनाक्रम बन गया है।