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कोयला घोटाले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्ट से त्वरित सुनवाई का आदेश

नयी दिल्ली: कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े घोटाला मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि इन मामलों की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने से बचा जाए और लंबित अपीलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर चार सप्ताह के भीतर किया जाए। अदालत ने स्पष्ट […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • August 19, 2026 5:00 pm IST, Published 4 minutes ago

नयी दिल्ली: कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े घोटाला मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि इन मामलों की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने से बचा जाए और लंबित अपीलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर चार सप्ताह के भीतर किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश किसी भी मामले के गुण-दोष पर उसकी राय नहीं माना जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने कोयला आवंटन से जुड़े मामलों की स्थिति रखी गई। सुनवाई के दौरान बताया गया कि कुछ मामलों में आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है, जबकि अन्य मामलों में राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट इन मामलों में ऐसी अंतरिम राहत न दे जिससे ट्रायल की प्रक्रिया रुक जाए। हालांकि, पीठ ने यह भी माना कि अगर किसी मामले में सुनवाई जारी रहती है और संबंधित पक्ष की याचिका पर फैसला नहीं आता, तो उसके अधिकारों पर असर पड़ सकता है। इसलिए हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह संबंधित याचिकाओं और अपीलों पर तेजी से सुनवाई करे और चार सप्ताह में निर्णय ले।

शीर्ष अदालत का यह निर्देश कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका आदेश किसी आरोपी के खिलाफ आरोपों की पुष्टि या उनके बचाव पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं है। संबंधित मामलों में फैसला कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

कोयला ब्लॉक आवंटन मामले लंबे समय से अदालतों में चल रहे हैं। वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने 1993 से 2010 के बीच आवंटित 214 कोयला ब्लॉकों को रद्द कर दिया था। अदालत ने उस समय इन आवंटनों की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद संबंधित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत की व्यवस्था की गई।

इन मामलों में विशेष सीबीआई अदालत को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। आरोप तय करने, मामलों को खत्म करने और जमानत से संबंधित आदेशों के खिलाफ अपील की प्रक्रिया को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने विशेष व्यवस्था बनाई थी। शुरुआती व्यवस्था के तहत विशेष अदालत के फैसलों के खिलाफ अपील सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने का प्रावधान था।

हालांकि, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने करीब 12 वर्ष पुराने इस व्यवस्था संबंधी आदेश में बदलाव किया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष और आरोपी दोनों विशेष न्यायाधीश के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। इस बदलाव के बाद कोयला आवंटन से जुड़े कई मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष अपील और याचिकाएं पहुंचीं।

मौजूदा सुनवाई इसी न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि मामलों में अनावश्यक देरी न हो और लंबित अपीलों पर समयबद्ध तरीके से फैसला आए। अदालत के ताजा निर्देश से दिल्ली हाईकोर्ट के सामने लंबित संबंधित मामलों की सुनवाई को गति मिलने की उम्मीद है।

कोयला आवंटन विवाद ने देश में प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन की पारदर्शिता को लेकर भी व्यापक बहस को जन्म दिया था। सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले के बाद सरकार की ओर से संसाधनों के आवंटन की प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए। वहीं, आपराधिक मामलों में अलग-अलग आरोपियों और कंपनियों के खिलाफ सुनवाई अब भी जारी है।

सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश इस बात पर केंद्रित है कि न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित समय में आगे बढ़े। अब दिल्ली हाईकोर्ट को संबंधित अपीलों और याचिकाओं पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी होगी। चार सप्ताह की समयसीमा पूरी होने के बाद मामलों की स्थिति स्पष्ट होगी और यह सामने आएगा कि संबंधित पक्षों को अदालत से क्या राहत मिलती है।

 

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