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सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार: समय रैना पर 3 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें न्यायालय के आदेशों का पालन न करने पर कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि अदालत के निर्देशों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और किसी भी स्थिति में न्यायिक आदेशों की अनदेखी […]

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  • July 14, 2026 6:22 pm IST, Published 48 minutes ago

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें न्यायालय के आदेशों का पालन न करने पर कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि अदालत के निर्देशों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और किसी भी स्थिति में न्यायिक आदेशों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि समय रैना ने पूर्व में दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया और अदालत को गुमराह करने की स्थिति उत्पन्न हुई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है और यदि कोई व्यक्ति अदालत के आदेशों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।

इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना सहित अन्य संबंधित पक्षों पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सभी संबंधित पक्ष दो सप्ताह के भीतर अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करें और यह स्पष्ट करें कि न्यायालय के निर्देशों का पालन किस प्रकार किया गया है।

पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि अदालत के आदेश केवल औपचारिकता नहीं होते, बल्कि उनका पालन करना कानून के शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी आदेश के संबंध में कोई कठिनाई या स्पष्टीकरण चाहिए तो वह अदालत के समक्ष उचित आवेदन प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन आदेशों की अनदेखी या उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन सभी मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, जिनमें अदालत के निर्देशों के पालन को लेकर लापरवाही बरती जाती है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अदालत अपने आदेशों के अनुपालन को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी।

अदालत ने फिलहाल संबंधित पक्षों को अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह का समय प्रदान किया है। इस अवधि के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा। यदि निर्धारित समय में निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय  ने अपने आदेश के माध्यम से संकेत दिया कि न्यायिक निर्देशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा, चाहे संबंधित व्यक्ति किसी भी क्षेत्र से जुड़ा हो।

 

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