• होम
  • देश
  • थरूर बोले- वंदे मातरम के सभी 6 छंद गाना लोगों के लिए बोझिल

थरूर बोले- वंदे मातरम के सभी 6 छंद गाना लोगों के लिए बोझिल

 हर कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत गाना मुश्किल, आपसी सहमति से निकले समाधान तिरुपति/तिरुवनंतपुरम: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सभी 6 छंदों को बजाने या गाने की अनिवार्यता पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे व्यावहारिक रूप से गैर-जरूरी और आम लोगों के लिए बोझिल […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 2, 2026 4:20 pm IST, Published 42 minutes ago

 हर कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत गाना मुश्किल, आपसी सहमति से निकले समाधान

तिरुपति/तिरुवनंतपुरम: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सभी 6 छंदों को बजाने या गाने की अनिवार्यता पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे व्यावहारिक रूप से गैर-जरूरी और आम लोगों के लिए बोझिल (असुविधाजनक) करार दिया है।

केरल के तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बात करते हुए थरूर ने साफ किया कि उन्हें राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे पूरा गाना तार्किक नहीं है।

पूरा गीत याद नहीं, दो बार खड़ा होना असुविधाजनक: थरूर

शशि थरूर ने अपनी बात के समर्थन में दिल्ली के एक हालिया कार्यक्रम का उदाहरण दिया, जिसमें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन भी मौजूद थे। थरूर के बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • परंपरा का हवाला: पारंपरिक रूप से कार्यक्रम की शुरुआत में वंदे मातरम का एक या दो छंद गाया जाता था, और आखिर में राष्ट्रगान (जन गण मन) बजाया जाता था।

  • लंबाई पर सवाल: वंदे मातरम का पूरा संस्करण काफी लंबा है। कार्यक्रम के शुरू और अंत में, दोनों समय इतनी देर तक लोगों के लिए खड़े रहना काफी असुविधाजनक हो जाता है।

  • कानूनी अनिवार्यता नहीं: संसद द्वारा पारित ऐसा कोई कानून नहीं है जो वंदे मातरम के सभी 6 छंदों को हर सरकारी कार्यक्रम में पूरी तरह बजाना अनिवार्य बनाता हो।

  • सिर्फ शुरुआती हिस्सा ही याद: आम तौर पर लोगों को राष्ट्रगीत की शुरुआती कुछ पंक्तियां ही जुबानी याद होती हैं, पूरा गीत सबको याद नहीं है।

“वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगीत है और हम इसके सम्मान में हमेशा खड़े होते हैं। जो हिस्सा पारंपरिक रूप से गाया जाता रहा है, उसकी लंबाई राष्ट्रगान जितनी ही है और उसे लंबे समय से सम्मान मिला हुआ है। इस मामले का समाधान आपसी सहमति से निकाला जाना चाहिए।” — शशि थरूर, कांग्रेस सांसद

केरल सरकार और राज्यपाल के बीच मतभेद

इस मुद्दे पर केरल में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही हैं:

  1. केरल सरकार का रुख: राज्य सरकार का मानना है कि कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा संस्करण (सभी 6 छंद) गाना पूरी तरह से वैकल्पिक (Optional) होना चाहिए, इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता।

  2. राज्यपाल का नजरिया: वहीं दूसरी ओर, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर का इस मामले को लेकर नजरिया सरकार और थरूर से अलग दिखाई देता है, जिसके चलते राज्य में इस पर बहस छिड़ गई है।

Advertisement