नई दिल्ली: देश में डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा भी चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों का प्रतिशत वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुना पाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में ग्राहकों से जुड़े 7.1 प्रतिशत ऑनलाइन लेनदेन संदिग्ध श्रेणी में दर्ज किए गए, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 3.8 प्रतिशत रहा। इससे स्पष्ट है कि भारत में साइबर अपराधी अब पहले से अधिक सक्रिय और संगठित तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म को निशाना बना रहे हैं।
देश में सबसे अधिक जोखिम ऑनलाइन अकाउंट लॉगिन के दौरान देखा गया, जहां पहचान चोरी और अकाउंट हैकिंग जैसी घटनाएं प्रमुख चुनौती बनकर उभरी हैं। इसके अलावा नए अकाउंट बनाने और वित्तीय लेनदेन के दौरान भी धोखाधड़ी की आशंका अधिक पाई गई।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो लॉजिस्टिक्स सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां संदिग्ध गतिविधियों का स्तर 16.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद टेलीकॉम क्षेत्र 14.7 प्रतिशत और बीमा क्षेत्र 11.5 प्रतिशत के साथ प्रमुख जोखिम वाले सेक्टरों में शामिल रहे। गेमिंग और ऑनलाइन कम्युनिटी प्लेटफॉर्म भी साइबर ठगों के निशाने पर बने हुए हैं।
विशेष रूप से टेलीकॉम क्षेत्र में धोखाधड़ी के मामलों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि बढ़ते डिजिटल उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा उपायों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी सुरक्षित रह सके।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के इस दौर में जागरूकता, मजबूत सुरक्षा प्रणालियां और सतर्क ऑनलाइन व्यवहार ही साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।